facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश, EWS छात्रों को नकदी की जगह दें ड्रेस

Advertisement
Last Updated- April 13, 2023 | 4:42 PM IST
Bomb Threat

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि शहर की सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के स्कूली विद्यार्थियों को स्कूली पोशाक मुहैया करानी चाहिए न कि नकद।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अगस्त 2014 में दिल्ली सरकार से कहा था कि वह छात्रों को स्कूली पोशाक प्रदान करे न कि नकद, और उस दिशा में किसी भी संशोधन के अभाव में, अधिकारियों को इसका पालन करना होगा।

अदालत यहां के स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों से संबंधित छात्रों को संसाधनों की आपूर्ति और बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों तथा दिल्ली बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 के प्रावधानों के कार्यान्वयन से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।

दिल्ली सरकार के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकार किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा रही है और अगले शैक्षणिक सत्र से वह छात्रों को स्कूली पोशाक भी देगी।

सरकारी वकील ने कहा कि अगले साल से स्कूलों के प्रमुख एक सर्वेक्षण किए जाने और अधिकारियों द्वारा अनुमोदित लागत के बाद बाजार से स्कूली पोशाक खरीद सकते हैं। इस बीच, वह वर्दी की खरीद के लिए नकद प्रदान करेंगे।

इस पर अदालत ने टिप्पणी की, ‘आपको नकद में भुगतान नहीं करना चाहिए। यह आदेश का अनुपालन नहीं है। अनुपालन एक स्कूल या स्कूलों के समूह के लिए एक दर्जी प्रदान करता है। सरकार कहेगी कि 50 रुपये प्रति मीटर कपड़ा मंजूर किया गया है। स्कूलों के प्रमुख कहेंगे कि 50 रुपए प्रति मीटर कपड़ा नहीं है।’

पीठ ने कहा, ‘हम सुनिश्चित करेंगे कि स्कूली पोशाक की आपूर्ति हो। हम इसकी निगरानी करेंगे।’ पीठ में न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद भी शामिल थे। पीठ ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 25 अगस्त तय की है।

Advertisement
First Published - April 13, 2023 | 4:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement