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हवाई जहाज में फ्री सीट चुनने का निर्देश टला, एयरलाइंस की आपत्तियों के बाद फैसला वापस

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 60 प्रतिशत सीटों का मुफ्त चयन अनिवार्य करने वाले इस प्रावधान को व्यापक समीक्षा पूरी होने तक अगले आदेशों तक के लिए रोक दिया गया है

Last Updated- April 03, 2026 | 11:11 PM IST
Air plane seat

सरकार ने अपना वह निर्देश रोक दिया है, जिसमें विमानन कंपनियों को किसी भी उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देने के लिए कहा गया था। किराये और इस क्षेत्र की मूल्य-निर्धारण संरचना पर पड़ने वाले संभावित असर के संबंध में उद्योग जगत की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है।

गुरुवार को जारी बयान में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 60 प्रतिशत सीटों का मुफ्त चयन अनिवार्य करने वाले इस प्रावधान को व्यापक समीक्षा पूरी होने तक अगले आदेशों तक के लिए रोक दिया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि उसने फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) और अकासा एयर से मिली आपत्तियों की जांच की है। उन्होंने इसके परिचालन और वाणिज्यिक असर के बारे में बताया गया है। साथ ही किराए की संरचना और बिना नियमन वाली किराया व्यवस्था के साथ इसके तालमेल को लेकर चिंताएं जताई हैं।

18 मार्च को घोषित इस निर्देश में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि 20 अप्रैल से हर उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चयन के लिए उपलब्ध कराई जाएं। इसमें यह भी प्रस्ताव था कि एक ही पीएनआर के तहत बुक किए जाने वाले यात्रियों को एक साथ सीटें दी जाएं।

इस कदम का जैसे ही ऐलान हुआ, विमानन कंपनियों ने इसका विरोध किया। 19 मार्च को लिखे पत्र में एफआईए ने इस निर्देश को किसी विमानन कंपनी के परिचालन के वाणिज्यिक पहलुओं में हद से ज्यादा नियामकीय दखल बताया और आगाह किया कि इससे हवाई किराये बढ़ेंगे और किफायती किरायों की उनकी क्षमता कम हो जाएगी। एफआईए के सदस्यों में एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल हैं।

संगठन ने तर्क दिया कि सीट चुनने के लिए ली जाने वाली फीस आय का वैध स्रोत है, खास तौर पर ऐसे माहौल में जिसमें लागत बहुत ज्यादा हो। उसने यह भी कहा कि विमानन कंपनियां ईंधन, रखरखाव और हवाई अड्डे के शुल्कों जैसे बढ़ते खर्चों की भरपाई के लिए सामान, भोजन और पसंदीदा सीटों जैसे आय के अतिरिक्त स्रोतों पर निर्भर रहती हैं। उसने चेतावनी दी कि इस तरह की आय में किसी भी तरह की कमी होने पर उसकी भरपाई संभवतः मूल किराये में बढ़ोतरी करके की जाएगी, जिसका असर सभी यात्रियों पर पड़ेगा।

उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि विमानन कंपनियां आम तौर पर सीट की जगह और लेगरूम (पैरों के लिए जगह) जैसे कारकों के आधार पर सीट चयन के लिए 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक शुल्क लेती हैं। वर्तमान में लगभग 20 प्रतिशत सीटें बिना किसी शुल्क के उपलब्ध होती हैं।

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First Published - April 3, 2026 | 11:08 PM IST

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