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GST घटने के बाद भी जरूरी सामान महंगे, रिसर्च में खुलासा- ग्राहकों तक नहीं पहुंचा फायदा

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काउंसिल ने पहले के 4 कर ढांचे 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत को घटाकर 3 कर ढांचे- 5 प्रतिशत 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत में परिवर्तित कर दिया है।

Last Updated- March 18, 2026 | 9:30 PM IST
GST

माल एवं सेवा कर (GST) दरों में कमी किए जाने से ज्यादातर आवश्यक वस्तुओं की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ा है। नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (NIPFP) के एक शोधपत्र में यह सामने आया है। इसके बजाय सितंबर 2025 से जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद के 4 महीनों में खाने-पीने की चीजों, घरेलू सामान और पर्सनल केयर उत्पादों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में ज्यादातर बढ़ोतरी ही हुई है। इससे संकेत मिलते हैं कि रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले सामान (एफएमसीजी) में कर छूट का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं मिला है।

जीएसटी काउंसिल ने दरों में कमी की थी, जो 22 सितंबर से लागू हुआ, जबकि कुछ हानिकारक वस्तुओं पर नई दर फरवरी से लागू हुई। काउंसिल ने पहले के 4 कर ढांचे 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत को घटाकर 3 कर ढांचे- 5 प्रतिशत 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत में परिवर्तित कर दिया है। विलासिता वाली वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर लगाया गया है। खाने-पीने के सामान और घरेलू उत्पादों, ऑटोमोबाइल, कृषि वस्तुओं, श्रम केंद्रित सामान, घर बनाने के सामान, मेडिकल और शिक्षा से जुड़े उत्पादों और स्वास्थ्य बीमा जैसे बड़े सेक्टरों में सांविधिक दरों में कटौती की गई, जिसका मकसद मांग बढ़ाना और ग्राहकों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना था।

एनआईपीएफपी के प्रोफेसर सच्चिदानंद मुखर्जी और रिसर्च फेलो शिवानी बडोला द्वारा लिखा पेपर ‘जीएसटी 2.0: डू लोवर टैक्स रेट्स ट्रांसलेट इनटू लोवर कंज्यूमर प्राइसेज?’ मंगलवार को जारी हुआ। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आधार वर्ष 2024 लागू होने के बाद यह पहला विस्तृत विश्लेषम है, जिसमें जीएसटी दर में बदलाव के बाद कीमतों की स्थिति की जांच की गई है।

लेखकों ने पुनर्गठन से पहले के 4 महीनों (मई-अगस्त 2025) और उसके बाद के 4 महीनों (अक्टूबर 2025–जनवरी 2026) के दौरान 355 वस्तुओं के औसत सीपीआई मूल्यों की जांच की। वस्तुओं को उनके पुराने और नए जीएसटी ढांचे के हिसाब से वर्गीकृत किया गया था और इस विश्लेषण में सिर्फ उन उत्पादों पर ध्यान दिया गया जिनकी दरें बदली थीं।

आवश्यक वस्तुओं पर कम असर

अब ज्यादातर खाद्य व बेवरिज आयटम 5 प्रतिशत कर या छूट के दायरे में हैं, जिनकी खुदरा कीमतें बढ़ी हैं। दूध के दाम 0.83 प्रतिशत, घी के दाम 0.77 प्रतिशत, पनीर के दाम 0.28 प्रतिशत बढ़े हैं। वहीं खजूर और मेवे की कीमत में 2.77 प्रतिशत और 2.06 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई है। डिब्बाबंद प्रसंस्करित खाद्य जैसे अचार, जैम, जेली, चॉकलेट और करी पाउडर की कीमत भी बढ़ी है।

इसी तरह पर्सनल केयर के सामान जैसे हेयर ऑयल और हेयर कलर की कीमत 2.77 प्रतिशत बढ़ी है, जिन पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। शैंपू, कंडीशनर, बॉडी लोशन अन्य ऐसी वस्तुओं की कीमत 1 प्रतिशत बढ़ी है। फर्निशिंग और रोजमर्रा के घरेलू रखरखाव के सामान में कुछ की ही कीमत कम हुई है, जबकि फर्नीचर, बर्तन, कालीन और धुलाई के सामान की खुदरा कीमत बढ़ी है।

टिकाऊ वस्तुओं पर असर

इसके विपरीत विवेकाधीन खरीद वाले सामान और महंगी टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत घटी है। एयर कंडीशनर पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिनकी खुदरा कीमत 6.40 प्रतिशत कम हुई है। कार और जीप की कीमत 7.52 प्रतिशत, मोटरसाइकिल व स्कूटर की कीमत 5.19 प्रतिशत, साइकिल की कीमत 0.95 प्रतिशत कम हुई है। टायर और ट्यूब, सिलाई मशीन और कुछ मेडिकल उपकरणों की कीमत भी घटी है। फुटवीयर की कीमत करीब 1 प्रतिशत कम हुई है।

कपड़ों की खुदरा कीमत बढ़ी है, क्योंकि दरों में समायोजन में यह ज्यादा कर के दायरे में आ गए हैं। वहीं दर में कटौती के बावजूद दवा की की कीमत बढ़ी है। हवाई यात्रा भी कुछ श्रेणी में 8.65 प्रतिशत बढ़ी है।

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First Published - March 18, 2026 | 9:20 PM IST

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