facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

रोज 5 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा, भारत में सड़कों पर घूम रहे करीब 1.5 करोड़ आवारा कुत्ते

Advertisement
Last Updated- March 12, 2023 | 11:29 PM IST
Rabies vaccine

नवंबर तक के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2022 में हर दिन औसतन 5,739 लोगों को कुत्तों ने काटा है। हालांकि महामारी के बाद से ऐसे मामलों में गिरावट देखी गई है। यदि महामारी पूर्व के स्तर को भी शामिल किया जाए तो औसत में इजाफा हो जाएगा। भारत ने 2019 से 2022 के बीच आवारा कुत्तों के काटने के करीब 1.6 करोड़ मामले दर्ज किए हैं (नवंबर, 2022 तक संसद के आंकड़े)। यानी, हर दिन 10,000 से भी अधिक मामले।

दर्ज किए गए आंकडों की वार्षिक संख्या 2019 के 73 लाख से घटकर 2022 के नवंबर तक 20 लाख से कम हो गई है।

2019 की पशुधन गणना रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। पानीपत से लेकर हैदराबाद और लखनऊ से पुणे तक आवारा कुत्तों के हमले, खासकर बच्चों पर हमला करने के मामले इस साल की शुरुआत से सुर्खियां बटोर रहे हैं। पिछले साल केरल में आवारा कुत्तों के हमलों के मामलों के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कुत्ते के खतरे से निपटने और सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन बनाने को कहा।

आवारा कुत्तों के हमले कुछ राज्यों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक समस्या हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें से लगभग 60 फीसदी हमले 2019 के बाद से उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल में हुए हैं। महामारी के बाद से संख्या में गिरावट आई है। 2022 में राज्यवार रैंकिंग में कुछ बदलाव दिखाती है। आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक अब शीर्ष पांच में शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के मुताबिक, भारत में दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों का 36 फीसदी हिस्सा है, क्योंकि यह दावा करता है कि देश में हर साल 18,000- 20,000 लोग मारे जाते हैं। 30 से 60 फीसदी मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की होती हैं।

Advertisement
First Published - March 12, 2023 | 11:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement