facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Extreme heat: पता चल गया किस वजह से बढ़ रही बड़े शहरों में गर्मी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Advertisement

कंक्रीटीकरण और आर्द्रता का स्तर बढ़ा रहा है, बड़े शहरों में गर्मी का खतरा: रिपोर्ट

Last Updated- May 28, 2024 | 6:45 PM IST
बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता, Taking the heat off: Rising heat increases concern for public health system

थिंक टैंक ने कहा कि बढ़ी हुई आर्द्रता सभी जलवायु क्षेत्रों में गर्मी की स्थिति को बढ़ा रही है, यहां तक ​​कि दिल्ली और हैदराबाद में हवा के तापमान में मामूली गिरावट भी बेअसर साबित हो रही है।

कंक्रीटीकरण और आर्द्रता का स्तर बढ़ने से भारत के महानगरों में गर्मी बढ़ रही है जहां एक दशक पहले की तरह रात तक में मौसम ठंडा नहीं हो रहा है। यह बात ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट’ (सीएसई) की एक नयी रिपोर्ट में कही गई है। सीएसई ने जनवरी 2001 से अप्रैल 2024 तक छह महानगरों- ​​दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई के लिए ग्रीष्मकालीन हवा के तापमान, भूमि की सतह के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता डेटा का विश्लेषण किया।

थिंक टैंक ने कहा कि बढ़ी हुई आर्द्रता सभी जलवायु क्षेत्रों में गर्मी की स्थिति को बढ़ा रही है, यहां तक ​​कि दिल्ली और हैदराबाद में हवा के तापमान में मामूली गिरावट भी बेअसर साबित हो रही है। बेंगलुरु को छोड़कर, 2001-2010 के औसत की तुलना में 2014-2023 तक अन्य पांच महानगरों में ग्रीष्मकालीन औसत सापेक्ष आर्द्रता 5-10 प्रतिशत बढ़ गई।

सीएसई की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भीषण गर्मी भारत के बड़े हिस्से में स्वास्थ्य और आजीविका को प्रभावित कर रही है। सीएसई में अनुसंधान मामलों की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, “शहरी केंद्रों के लिए एक व्यापक ताप प्रबंधन योजना विकसित करने के लिए दिन और रात के तापमान के साथ-साथ गर्मी, सापेक्ष आर्द्रता और भूमि की सतह के तापमान में बदलती प्रवृत्ति का आकलन करना आवश्यक है।”

सीएसई की नगर प्रयोगशाला के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक अविकल सोमवंशी ने कहा कि भीषण गर्मी और आर्द्रता से निपटना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मानव शरीर के मुख्य शीतलन तंत्र ‘पसीने’ को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा, “त्वचा से पसीने का वाष्पीकरण हमारे शरीर को ठंडा करता है, लेकिन उच्च आर्द्रता स्तर इस प्राकृतिक ठंडक को सीमित कर देता है। परिणामस्वरूप, लोग गर्मी और बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं।’’ अध्ययन में कहा गया कि महानगरों रात में ठंडक नहीं हो रही है।
सोमवंशी ने कहा, “गर्म रातें दोपहर के चरम तापमान जितनी ही खतरनाक होती हैं। अगर रात भर तापमान अधिक रहता है तो लोगों को दिन की गर्मी से उबरने का मौका कम मिलता है।’’ अध्ययन में कहा गया कि आर्द्रता के बढ़ते स्तर ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में मानसून को मानसून पूर्व अवधि की तुलना में अधिक गर्म बना दिया है।

इसमें कहा गया कि पिछले दो दशकों में सभी महानगरों में अधिक कंक्रीटीकरण हुआ है जिससे गर्मी की स्थिति बढ़ गई है। सीएसई ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हरित आवरण में वृद्धि रात की गर्मी को कम करने में प्रभावी नहीं है।

Advertisement
First Published - May 28, 2024 | 6:45 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement