facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

अनिश्चितता दिखाता है देश से बाहर FDI का जाना, मार्च में 7.06 अरब डॉलर पर पहुंचा

Advertisement

यह इससे पिछले महीने के मुकाबले 156 फीसदी अधिक है और साल 2021 के बाद से सबसे उच्च स्तर है

Last Updated- May 05, 2026 | 11:03 PM IST
FDI

भारत का देश से बाहर जाने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मार्च में बढ़कर 7.06 अरब डॉलर हो गया। यह इससे पिछले महीने के मुकाबले 156 फीसदी अधिक है और साल 2021 के बाद से सबसे उच्च स्तर है।

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘देश से बाहर की ओर होने वाले एफडीआई में अल्पकालिक उछाल आम तौर पर अनिश्चितताओं के कारण होती है। अगर निवेशक घरेलू अर्थव्यवस्था में मिलने वाले रिटर्न के बारे में अनिश्चित होते हैं तो वे अस्थायी तौर पर विदेश में अवसर तलाशते हैं।’

देश से बाहर की ओर जाने वाला मासिक एफडीआई निवेश साल 2024 की शुरुआत से ही लगातार 2 से 7 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश से बाहर की ओर जाने वाला एफडीआई बढ़कर 48.6 अरब डॉलर हो गया जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 41.6 अरब डॉलर था।

क्षेत्रीय ढांचे में भी काफी बदलाव आया है। देश से बाहर होने वाले एफडीआई में वित्तीय सेवा का हिस्सा अब सबसे अधिक है। उसमें साल 2021 से 2026 के बीच 12.31 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जबकि इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 14.52 फीसदी कम हुआ।

मद्रास स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के निदेशक एनआर भानुमूर्ति ने कहा, ‘साल 1991 के सुधारों के बाद भारत एक सेवा आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हुआ है। वित्तीय सेवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी इसी दीर्घकालिक ढांचागत वास्तविकता को दर्शाती है।’

सेन ने कहा, ‘यह घरेलू वित्तीय बाजारों के अपेक्षाकृत कम विकसित होने को दर्शाता है। निवेशक अपनी पूंजी के निवेश के लिए विदेश में अधिक परिपक्व एवं बेहतर वित्तीय व्यवस्था की तलाश करते हैं।’

निवेश के गंतव्यों में भी बदलाव आया है। सिंगापुर ने भारत के पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है जबकि अमेरिका की स्थिति में गिरावट आई है। मॉरीशस का रुझान काफी अस्थिर रहा है।

भानुमूर्ति ने कहा,’भारत में पिछले साल के मुकाबले अधिक एफडीआई आ रहा है। देश से बाहर जाने वाले एफडीआई में थोड़ी बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि कोई बड़ा बदलाव हो रहा है।’

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने हाल में घोषणा की कि वह अमेरिकी कंपनी ऑर्गेनान का अधिग्रहण करेगी जिससे 11.75 अरब डॉलर का एफडीआई बाहर जाएगा। यह विदेश में किसी भारतीय कंपनी द्वारा की गई सबसे बड़ी खरीद में शामिल है। इस सौदे को पूरा होना अभी बाकी है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान एफडीआई का रुझान कैसा रहा है।

Advertisement
First Published - May 5, 2026 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement