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जंग के कारण रद्द हुई फ्लाइट या होटल बुकिंग? जानिए रिफंड के नियम

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एयरलाइन उड़ान रद्द करे तो पूरा पैसा वापस, लेकिन खुद टिकट कैंसल करने पर अलग हो सकते हैं नियम

Last Updated- March 09, 2026 | 9:03 AM IST
DGCA

पश्चिम एशिया घूमने की योजना बना चुके कई मुसाफिर वहां जंग छिड़ने की वजह से अब उड़ान और होटल आदि की बुकिंग रद्द करा रहे हैं। मगर उनमें से कुछ को यही नहीं पता कि उड़ान और होटल की बुकिंग रद्द कराने पर किस तरह के नियम लागू होते हैं और उन्हें बुकिंग के लिए जमा कराई गई रकम वापस मिलेगी या नहीं। ऐसे यात्रियों को कुछ बातें ठीक से समझ लेनी चाहिए।

तनाव की स्थिति में क्या करें

शांत होकर बैठें और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लें। एयरलाइन ईमेल, एसएमएस या ऐप के जरिये आधिकारिक रूप से आपसे संपर्क करेगी, इसलिए उसके संदेश जांचते रहें। कोई भी कदम उठाने से पहले कैंसलेशन और रिफंड के बारे में एयरलाइन की नीति पता होना भी जरूरी है। पिकयोरट्रेल के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक हरि गणपति कहते हैं, ‘सैलानियों को पहले तय करना होगा कि वे अब भी यात्रा करना चाहते हैं या रिफंड चाहते हैं।’

एयरलाइन कब करेगी रिफंड

अगर युद्ध या हवाई मार्ग बंद होने की वजह से एयरलाइन कोई उड़ान रद्द करती है तो नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियम एकदम साफ हैं। बुकिंग करा चुके यात्री को पूरी रकम वापस मिलती है या एक भी पाई और खर्च किए बगैर उसकी यात्रा की वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाती है।

लड़ाई छिड़ने पर या हवाई मार्ग बंद होने पर अगर कोई एयरलाइन अपनी उड़ान रद्द करती है तो इसे ‘फोर्स मैजर’ कहा जाता है। गणपति समझाते हैं, ‘जब युद्ध, हवाई मार्ग की बंदी या सरकार के निर्देशों जैसी असामान्य परिस्थितियों के कारण उड़ान रद्द की जाती है तो आम तौर पर एयरलाइंस को अलग से मुआवजा नहीं देना पड़ता। लेकिन इन परिस्थितियों में मूल टिकट की रकम वापस की जाती है।’

एयरलाइन आपका टिकट कैंसल कर रही है तो यह बात उससे लिखित में मांगें। ऐढास लीगल में पार्टनर यथार्थ रोहिला बताते हैं, ‘लिखित पुष्टि हो जाए तो टिकट बुक कराते समय एयरलाइन के साथ हुए करार और भारतीय विमानन नियमों के तहत रिफंड का अधिकार बढ़ जाता है।’

विशेषज्ञों की मानें तो खुद टिकट कैंसल कराने के बजाय इंतजार करें कि एयरलाइन ही उड़ान रद्द कर दे। गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहील पटेल समझाते हैं, ‘अगर यात्री खुद टिकट रद्द करा लेता है मगर उड़ान चालू रहती है तो तब तक किराये के सामान्य नियम लागू होंगे, जब तक एयरलाइन किराया माफ करने के या मुफ्त में कैंसल करने की नीति नहीं लाती है।’

जब एयरलाइन उड़ान को टालने या शुल्क माफ करने जा रही हो तो नॉन-रिफंडेबल किराये वाले टिकट कैंसल बिल्कुल नहीं करें। रोहिला की सलाह है, ‘यात्रियों को खुद टिकट कैंसल नहीं करने चाहिए बल्कि एयरलाइन से लिखित कैंसलेशन मांगना चाहिए ताकि रिफंड का उनका अधिकार बना रहे।’

अगर एयरलाइन आपको वैकल्पिक उड़ान का प्रस्ताव देती है तो उसे स्वीकार करना और यात्रा करना जरूरी नहीं है। अगर आपको लगता है कि तेज होते युद्ध के बीच आपको सफर नहीं करना है तो आप एयरलाइन से उसकी जगह पूरा किराया वापस मांग सकते हैं।

कैसे होगा रिफंड

अगर आपने सीधे एयरलाइन से ही टिकट बुक किया है तो उसकी वेबसाइट, ऐप या ग्राहक सेवा माध्यमों पर जाकर रिफंड का अनुरोध करें। आपका अनुरोध आने पर एयरलाइन टिकट की रकम उसी माध्यम से वापस करेगा, जिस माध्यम से आपने बुकिंग की थी। उसे नियामक द्वारा तय की गई समयसीमा के भीतर रिफंड करना पड़ेगा।

पटेल बताते हैं, ‘सीधे एयरलाइन से टिकट बुक किया है और एयरलाइन युद्ध या हवाई मार्ग बंद होने के कारण उड़ान रद्द करती है तो डीजीसीएस के नियमों के तहत सात कामकाजी दिनों के भीतर रिफंड आ जाना चाहिए।’ गणपति कहते हैं कि एयरलाइन से सीधे टिकट बुक करने पर रिफंड 7 से 14 कामकाजी दिन के भीतर आता है। अगर आपने विदेश के लिए टिकट बुक कराया था तो रिफंड में ज्यादा समय लग सकता है।

एजेंट या किसी यात्रा प्लेटफॉर्म के जरिये बुकिंग की है तो रिफंड उसी एजेंट या प्लेटफॉर्म के माध्यम से आएगा। यात्रा प्लेटफॉर्म एयरलाइन से बात करेगा और रिफंड की स्थिति ग्राहक को बताएगा। एजेंट के जरिये बुकिंग की है तो एयरलाइन टिकट की रकम एजेंट को भेजेगी और वह मुसाफिर के पास भेजेगा।

गणपति समझाते हैं, ‘एजेंट या प्लेटफॉर्म के जरिये बुकिंग होने पर रिफंड आने में 14 से 21 कामकाजी दिन तक लग सकते हैं क्योंकि पहले एयरलाइन रिफंड जारी करती हैं और उसके बाद इंटरमीडियरी उसे ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।’ अगर बड़ी तादाद में बुकिंग रद्द हों या वैश्विक उथलपुथल हो तो अक्सर देर हो जाती है। रोहिला कहते हैं, ‘बेवजह देर हो तो उसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कोताही माना जा सकता है और कानूनी चुनौती दी जा सकती है।’

रिफंड अटके तो क्या करें

अगर रिफंड में ज्यादा देर हो रही है तो केस नंबर या रेफरेंस नंबर के साथ एयरलाइन अथवा बुकिंग प्लेटफॉर्म से बात करें। मामले का पता लगाने के लिए ईमेल या शिकायत के विवरण जैसे लिखित संदेश रखना जरूरी है। रिफंड में देर होती है या बार-बार बात करने से भी मामला नहीं निपटता है तो रिफंड के डीजीसीए द्वारा तय की गई मियाद का जिक्र करते हुए एयरलाइन या बुकिंग प्लेटफॉर्म को लिखित शिकायत करें। पटेल कहते हैं, ‘कोई जवाब नहीं आता है तो उपभोक्ता आयोग के पास जाएं और सेवा में कमी की शिकायत करते हुए मुआवजा अथवा ब्याज मांगें।’

रिफंड के लिए क्या करें क्या नहीं करें

रिफंड का अनुरोध आधिकारिक माध्यम से ही करें। गणपति आगाह करते हैं, ‘रिफंड के लिए अनुरोध बार-बार न डालें या अलग-अलग रकम के लिए न डालें वरना रिफंड आने में देर हो सकती है।’ रिफंड की प्रक्रिया में जबानी वादों पर ही भरोसा करके न बैठ जाएं। जो भी वादा किया जा रहा है, उसे लिखित में लें। जब तक रिफंड आ नहीं जाता तब तक सारी लिखित सामग्री संभालकर रखें।

होटल से रिफंड

युद्ध को सामान्य नियमों के तहत आम तौर पर फोर्स मैजर ही माना जाता है। अकॉर्ड ज्यूरी में मैनेजिंग पार्टनर अलै रिजवी कहते हैं, ‘अगर सरकारी बंदी या सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों के कारण होटल चलाना नामुमकिन हो जाए तो होटल को सेवा में कोताही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।’

अगर काम करना कानूनी तौर पर नामुमकिन हो जाए या गैर-कानूनी हो जाए तो उन्हें बुकिंग की एडवांस राशि वापस करनी पड़ती है। रिजवी बताते हैं, ‘लेकिन युद्ध या क्षेत्रीय संघर्ष के कारण उड़ानें रद्द हों और उस वजह से खुद ही बुकिंग कैंसल कराई जाए तो होटल एडवांस राशि वापस करने के लिए बाध्य नहीं होते।’

बुकिंग कन्फर्म होते समय और एडवांस चुकाते समय एक बाध्यकारी समझौता हो जाता है। उसमें दी गई शर्तें बताती हैं कि चुकाई गई कौन सी बुकिंग राशि वापस नहीं होती और फ्री पीरियड के बाद अतिथि खुद ही बुकिंग कैंसल कराएं तो किस तरह का जुर्माना उन पर लगता है। रिजवी का कहना है, ‘अगर होटल इन शर्तों का उल्लंघन नहीं करता है या कोई अनहोनी ग्राहक को होटल आने से नहीं रोकती है तो यहां की अदालतें भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत इन शर्तों को सही करार देती हैं।’ सैलानियों को होटल की नीति के हिसाब से कुछ रकम लौटाई जा सकती है। मगर नॉन-रिफंडेबल बुकिंग का नियम तब तक सख्ती से लागू किया जाता है जब तक होटल खुद ही नियम और शर्तें नहीं तोड़ देता।

रिफंड की संभावना बढ़ाएं

जब आप बुकिंग करते हैं तब (खास तौर पर अगर आपका कार्यक्रम बदल सकता हो) वे कमरे या किराया चुनें, जिस पर ‘फ्री कैंसलेशन’ लिखा हो। इस तरह का किराया चुनने पर आपको एक तय अवधि के भीतर बुकिंग रद्द करने पर जुर्माना नहीं भुगतना पड़ता।

ऐसी परिस्थितियों की लिखित सूचना होटल या बुकिंग प्लेटफॉर्म को फौरन भेजें और साथ हमें उड़ान कैंसल होने के दस्तावेज जैसे सबूत भी लगा दें। सरकार या विदेश मंत्रालय ने यात्रा स्थल को असुरक्षित करार देते हुए सफर नहीं करने की एडवाइजरी या चेतावनी जारी की हो तो उसे भी साथ में लगा दें। रिजवी सुझाते हैं, ‘सूचना इस तरह लिखें कि अपनी मर्जी से कैंसल करना नहीं लगे बल्कि फोर्स मैजर के कारण यात्रा नामुमकिन हो जाने के के कारण कैंसल करने की विवशता लगे।’

होटल के लिए बुकिंग की रकम ऐसे क्रेडिट कार्ड से चुकाएं जिसमें ‘ट्रिप इंटरप्शन’ बीमा भी हो। अगर आपकी यात्रा में खलल पड़ता है और आपको उसे रद्द करना या बीच में ही खत्म करना पड़ता है तो कार्ड के इस बीमा के जरिये आपको होटल की नॉन-रिफंडेबल राशि का कुछ हिस्सा मिल सकता है। हां, आपने जो वजह बताई है वह कार्ड के बीमा में बताई गई वजहों में शामिल होनी चाहिए। अगर आपको रिफंड नहीं किया जा रहा है तो उपभोक्ता फोरम में जाएं। वहां जाते समय सही दस्तावेज और पहले हुए वैसे ही उदाहरण साथ में रखना नहीं भूलें।

यात्रा बीमा से फायदा

सामान्य यात्रा बीमा पॉलिसी में आम तौर पर युद्ध शामिल नहीं होता, इसलिए युद्ध के कारण बुकिंग रद्द होने की सूरत में रकम शायद वापस नहीं मिले। इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया में विशेषज्ञ हरि राधाकृष्णन कहते हैं, ‘यात्रा रद्द होने, बीच में ही खत्म होने, रुकावट आने या बढ़ जाने की स्थिति के लिए जो बीमा लिया जाता है उसमें आम तौर पर सभी जोखिम नहीं आते।’ इस प्रकार का बीमा कुछ खास आपदाओं में ही काम आता है, जैसे सैलानी या उसके रक्त संबंधी का अस्पताल में भर्ती होना अथवा मौत होना, प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक जोखिम (दंगे, हड़ताल आदि) और पासपोर्ट या वीजा गुम होना।

राधाकृष्णन बताते हैं, ‘यदि युद्ध या युद्ध जैसी स्थितियों के कारण यात्रा रद्द की जाए अथवा व्यवधान पड़े तो यह यात्रा बीमा में उल्लिखित आकस्मिक परिस्थिति नहीं है और हो सकता है कि बीमा पॉलिसी में इसे बाहर रखने की बात साफ तौर पर लिखी भी गई हो।’

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First Published - March 9, 2026 | 8:59 AM IST

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