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CAA: पहली बार CAA के तहत 14 लोगों को दी गई भारतीय नागरिकता, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

ये प्रमाण पत्र CAA अधिसूचित होने के करीब दो महीने बाद दिए गए हैं।

Last Updated- May 15, 2024 | 5:43 PM IST
CAA

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत केंद्र सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी अधिनियम के तहत आज पहली बार 14 लोगों को भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए गए। ये प्रमाण पत्र CAA अधिसूचित होने के करीब दो महीने बाद दिए गए हैं।

CAA के अनुसार, इन तीन देशों से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए बिना दस्तावेज वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोगों को अब सिर्फ 5 साल (पहले 11 साल) भारत में रहने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन करने की पात्रता मिल गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बांटे गए नागरिकता प्रमाण पत्र

केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने दिल्ली में आवेदकों को नागरिकता प्रमाण पत्र वितरित किए और CAA के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया। इस कार्यक्रम में डाक सचिव, निदेशक (आईबी), भारत के रजिस्ट्रार जनरल और वरिष्ठ अधिकारी जैसे अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी भी उपस्थित थे।

CAA लागू होने में क्यों हुई देरी?

भारत सरकार ने दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया था। इस कानून का मकसद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देना है, जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया गया था। इनमें हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के लोग शामिल हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी, इस कानून को लागू करने में देरी हुई।

दरअसल, जिन नियमों के तहत नागरिकता दी जानी थी, उन्हें बनने में चार साल से ज्यादा लग गए। सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है कि ये देरी कोरोना महामारी की वजह से हुई। गौरतलब है कि भाजपा ने 2019 के चुनाव में ही CAA लागू करने का वादा किया था।

CAA को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमलावर

CAA को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमलावर है। उनका आरोप है कि ये कानून भेदभावपूर्ण है और इसका मकसद लोकसभा चुनावों में फायदा उठाना है। हालांकि, सरकार का कहना है कि ये कानून किसी भी सताए हुए मुस्लिम को भारतीय नागरिकता लेने से नहीं रोकता। असल में विवाद की जड़ ये है कि CAA लागू करने के बाद देश के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए।

लोगों को ये डर सता रहा है कि कहीं उन्हें इस कानून के तहत अवैध अप्रवासी घोषित ना कर दिया जाए और उनकी नागरिकता ना छीन ली जाए। सरकार इन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि ये कानून मुस्लिम-बहुल देशों में प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यकों, जैसे हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों की मदद के लिए है।

सरकार का दावा है कि ये कानून भारत की उदार परंपरा के तहत उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए बनाया गया है। गृह मंत्रालय ने ये भी साफ किया है कि किसी भी भारतीय नागरिक को ये साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे कि वो असल में भारतीय हैं। साथ ही, उन्होंने ये भी बताया है कि CAA कानून का अवैध अप्रवासियों को देश से निकालने से कोई लेना-देना नहीं है।

First Published - May 15, 2024 | 5:43 PM IST

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