सरकार ने गैस की सप्लाई को पटरी पर लाने के लिए तेज कदम उठाए हैं। खासकर शहरों में पाइप्ड गैस पहुंचाने और कमर्शियल LPG के दबाव को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने अपने सभी ऑफिसों को आदेश दिया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के आवेदनों को महज 10 दिनों के अंदर निपटाया जाए। इससे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को जल्दी घर-घर पहुंचाने में मदद मिलेगी।
साथ ही सरकार ने बड़े शहरों और कस्बों में कमर्शियल LPG यूजर्स को PNG अपनाने की सलाह दी है। इसका मकसद है LPG पर बोझ को धीरे-धीरे कम करना। सरकार ने दावा किया है कि अभी भी घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बिल्कुल ठीक चल रही है। किसी डीलरशिप पर गैस खत्म होने की शिकायत नहीं आई। डिलीवरी का सिस्टम पहले जैसा ही है, ज्यादातर अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) से हो रही है। पहले वाली अफरा-तफरी और बार-बार बुकिंग अब काफी कम हो गई है।
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सरकार ने कमर्शियल LPG की मात्रा को लगातार बढ़ाया है। पहले 20 फीसदी सप्लाई बहाल हुई, फिर 18 मार्च को PNG से जुड़े सुधारों के तहत 10 फीसदी और जोड़ा गया। 21 मार्च को एक बार में 20 फीसदी और क्लियर कर दिया। अब कुल मिलाकर कमर्शियल LPG 50 फीसदी तक पहुंच गई है।
इस बढ़ोतरी का फायदा सबसे पहले रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों, फैक्ट्री कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, डेयरी वाले, कम्युनिटी किचन और सरकारी सब्सिडाइज्ड खाने के ठिकानों को मिल रहा है। माइग्रेंट मजदूरों के लिए 5 किलो के सिलेंडर भी मुहैया कराए गए हैं।
करीब 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। बाकी इलाकों में पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियां सप्लाई संभाल रही हैं। पिछले आठ दिनों में करीब 15,440 टन कमर्शियल LPG उठाई गई है।
स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों को टॉप प्राथमिकता बनी हुई है। ये दोनों सेक्टर कुल कमर्शियल LPG का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया भर में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर चीजें कंट्रोल में हैं और शहरों में PNG की ओर शिफ्ट होने की कोशिशें तेज हैं।
(PTI के इनपुट के साथ)