देश भर में एलपीजी के लिए अफरा-तफरी के बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शहरी गैस वितरण (सीजीडी) के बुनियादी ढांचे के विकास की गति को तेज करने के दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह जानकारी एक सरकारी सर्कुलर से सामने आई।
मंगलवार को जारी सर्कुलर में कहा गया, ‘एलपीजी की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखते हुए तथा सीजीडी ढांचा विस्तार तेज करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि अगले तीन महीनों तक सीजीडी अधोसंरचना को तेजी से मंजूरी देने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान इसके अलावा रास्ता देने के अधिकार सहित मौजूदा नीतिगत ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।’
सीजीडी आवेदन को अब अस्थायी रूप से ही सही लेकिन प्राथमिकता से निपटाना होगा। नई नीति में राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ गैस पाइपलाइन बिछाते समय रास्ता देने के अधिकार को तेजी से मंजूर किया जाएगा। मंत्रालय ने भारतनेट परियोजनाओं के लिए भी इस मानक का इस्तेमाल किया।
सर्कुलर में कहा गया है, ‘इस ढांचे की सीमित संचालन अवधि के दौरान, ऐसी प्रस्तावनाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में रखने की आवश्यकता को प्रक्रियागत देरी से बचने के लिए समाप्त कर दिया गया है।’सरकार घरों को पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिसकी आयात निर्भरता एलपीजी की तुलना में कम है। एलपीजी का उपयोग भारतीय घरों में प्रमुख रूप से होता है। पश्चिम एशिया में युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित होने के कारण सरकार ने लोगों से एलपीजी बचाने का आग्रह किया है। भारत के अधिकांश एलपीजी आयात ईरान के पास स्थित अब अवरुद्ध हो चुके होर्मुज स्ट्रेट से आते हैं।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) या लिक्विड कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (एलसीएनजी) स्टेशनों से संबंधित सभी अनुमति आवेदन को प्राथमिकता दी जाएगी और 30 दिनों के भीतर निपटाया जाएगा।
राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि कार्यों के निष्पादन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई निष्पादन एजेंसी से दर सूची के आधार पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क सहित की जाएगी।