वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया ने 2027 के मध्य तक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए फिर से बातचीत पूरी करने का फैसला किया है। इसमें दोनों देशों के लिए ज्यादा फायदेमंद साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही गैर शुल्क बाधाओं और ओरिजन के नियमों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
गोयल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा,‘लगातार और संयुक्त प्रयासों के बाद दोनों देशों ने पहले बनी सहमति से आगे बढ़कर साझा हितों वाले प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने और दोनों पक्षों के लिए लाभदायक साझेदारी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसमें साझा हितों वाले अहम क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा, साथ ही गैर शुल्क रुकावटों और ओरिजन के नियमों को भी सुलझाया जाएगा। नए सिरे से होने जा रही बातचीत 2026 के आखिर तक या अधिक से अधिक 2027 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है।’
गोयल की यह पोस्ट इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी टीवी मोहनदास पई की एक पोस्ट की प्रतिक्रिया के तौर पर आई है। पई ने भारत में काम कर रही दक्षिण कोरियाई कंपनियों द्वारा मुनाफे को अपने देश में ले जाने से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
गोयल को टैग करके पई ने लिखा, ‘उनकी एक ऐसी शिकारी नीति है जो भारत को आयात पर निर्भर बनाती है। उनका स्थानीयकरण भी कमजोर है। वे भारतीय व्यवसायों को अपने बाजारों में उतनी आजादी से आने नहीं देते, जितनी आजादी भारत उन्हें देता है। कृपया उन पर दबाव डालें कि वे अपने बाजार खोलें।’
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मुक्त व्यापार समझौता 2008 में संयक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग-2) के कार्यकाल में हुआ, जिसे 2010 में लागू किया गया। यह एक ‘खराब ढंग से बातचीत किए गए, असंतुलित्र समझौते का नतीजा है, जो भारत के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, ‘उसके बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 92.7 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें भारत का आयात 103.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो साफतौर पर भारत के अनुकूल नहीं है। ऐसे में जहां कुल कारोबार बढ़ा है, वहीं व्यापार घाटा भी बढ़ गया है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया की तत्कालीन राष्ट्रपति पार्क ग्यून हे ने 2015 में मुलाकात की, जिसमें संशोधित भारत-दक्षिण कोरिया मुक्त व्यापार पर बातचीत करने पर सहमति बनी थी, जिससे मात्रात्मक और गुणात्मक हिसाब से दोनों पक्षों को लाभ हो।