Green Energy- Employment opportunity: भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजन की बड़ी संभावनाएं उभर रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) और नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल इंडिया (एनआरडीसी इंडिया) की ‘ड्राइविंग एनर्जी ट्रांजिशन: वर्कफोर्स, स्किल्स एंड जेंडर इन इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर’ शीर्षक से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता लक्ष्य और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 44 लाख से अधिक पूर्णकालिक रोजगार (एफटीई) सृजित हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूफटॉप सोलर इस रोजगार वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा और कुल संभावित नौकरियों में इसकी हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत होगी। रिपोर्ट वर्ष 2024-25 के दौरान सौर, पवन, जैव ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्रों की कंपनियों के सर्वेक्षण पर आधारित है।
इस रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच चयनित स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में 6.5 लाख से अधिक नए कामगार जुड़े हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान रूफटॉप सोलर क्षेत्र का रहा, जिसने कुल रोजगार वृद्धि में 62 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद पीएम-कुसुम योजना की 16.3 प्रतिशत, जैव ऊर्जा की 12.6 प्रतिशत और ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाओं की 6 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
अध्ययन में कहा गया है कि रूफटॉप सोलर परियोजनाएं विकेंद्रीकृत प्रकृति की होने के कारण अधिक रोजगार सृजित करती हैं। प्रत्येक घर, दुकान और इमारत पर अलग-अलग स्थापना, सर्वेक्षण, डिजाइन, ग्रिड कनेक्शन और रखरखाव की आवश्यकता होती है। इसी वजह से प्रति मेगावाट क्षमता पर रूफटॉप सोलर करीब 45 लोगों को एक साल के लिए काम देता है, जबकि बड़े सौर संयंत्र केवल 1 व्यक्ति और पवन ऊर्जा परियोजनाएं लगभग 0.6 व्यक्ति को एक साल के लिए रोजगार देती हैं।
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सीईईडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि भारत का एनर्जी ट्रांजिशन वर्कफोर्स ट्रांजिशन भी होना चाहिए। यह अवसर रोजगार सृजन, कौशल निर्माण, घरेलू सप्लाई चेन्स को मजबूत बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ इसके लाभ परिवारों, किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों तक भी पहुंचें। भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षा को एक टिकाऊ रोजगार इंजन में बदलने के लिए भारत को उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास (स्किलिंग), कर्मचारियों के पारदर्शी आंकड़े और समावेशी भागीदारी में अपना निवेश जारी रखना चाहिए।
एमएनआरई के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि कहा कि पिछले साल हमने लगभग 51 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता हासिल की है। उम्मीद है कि यह रफ्तार आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी।
इस अध्ययन से पता चलता है कि सौर और पवन ऊर्जा को स्थापित करने और उपकरण निर्माण क्षेत्रों के कुल कार्यबल में महिलाओं का हिस्सा सिर्फ 11 प्रतिशत है। रूफटॉप सोलर में महिलाओं की सर्वाधिक 15 प्रतिशत भागीदारी है। इसके बाद सोलर मॉड्यूल निर्माण में 13 प्रतिशत, फ्लोटिंग सोलर में 12 प्रतिशत और जमीन पर लगने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में 11 प्रतिशत है। अध्ययन के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा कार्यबल में शामिल 61 प्रतिशत महिलाएं गैर-तकनीकी भूमिकाओं जैसे कि मानव संसाधन, अकाउंटिंग और एडमिनिस्ट्रेशन में काम करती हैं।
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इस अध्ययन में एमएनआरई और संबंधित संस्थानों को सब्सिडी वितरण, निविदाओं और नियामक ढांचे जैसी मौजूदा प्रक्रियाओं के जरिए कार्यबल की अनिवार्य रिपोर्टिंग को संस्थागत रूप देना चाहिए। इसके साथ, स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों से लैंगिक समावेश और करियर को उन्नत बनाने वाले कार्यक्रम में निवेश करने की अपील करनी चाहिए। प्रशिक्षण संस्थानों को व्यावहारिक शिक्षा को मजबूत करना चाहिए और अपने पाठ्यक्रम को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाना चाहिए।