बहरामपुर के जिला प्रशासनिक कार्यालय के बाहर मैदान में घास पर बैठी रोकिना के हाथ में फोटोकॉपी किए गए दस्तावेजों का बंडल है। वह अपने बेटे का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ अपील करने आई हैं। फोटोकॉपी कराने में उनके लगभग 200 रुपये खर्च हो गए। उनके जैसी महिला के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी, जिसके पास आमदनी का कोई नियमित जरिया नहीं है।
परेशानी पूछने पर रोकिना की आंखों में छलक आते हैं, वह सवाल करती हैं, ‘क्या इतना पैसा खर्च करना और कागजात जमा कराना उनके लिए बेहद जरूरी है? क्या मैं इसे वहन कर सकती हूं?’ रोकिना लगभग तीन साल पहले विधवा हो गई थीं। राजमिस्त्री का काम करने वाले उनके बेटे को लगातार काम नहीं मिल पाता। यदि उसका नाम मतदाता सूची से बाहर रह गया तो क्या होगा, इस अनिश्चितता का बोझ उन पर भारी है। जिस भवन में अपीलें जमा की जा रही थीं, उसके बाहर दर्जनों लोग इसी तरह अपने-अपने दस्तावेजों के मोटे बंडल थामे बारी का इंतजार कर रहे थे। इन बंडलों में पहचान पत्र, पहचान साबित करने के लिए पुराने कागजों की फोटोकॉपी और भूमि रिकॉर्ड आदि मौजूद थे। ये कागज इतने पुराने थे कि इनमें से कुछ को पढ़ पाना भी मुश्किल हो रहा था।
रेजिनगर के 63 वर्षीय अजीजुल शेख के लिए समस्या उनके नाम को लेकर है। वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम बबलू शेख के रूप में सूचीबद्ध था। इलाके में वह इसी उपनाम से जाने जाते थे। बाद में उन्होंने अदालत के हलफनामे के माध्यम से इसे अपने आधिकारिक नाम में बदलवाया। इसी विसंगति के कारण उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। समस्या पूछने पर वह सवालों की झड़ी लगा देते हैं, ‘क्या मुझे निर्वासित कर दिया जाएगा? क्या मुझे अब आत्महत्या कर लेनी चाहिए? बड़े-बड़े दावे करने वाले राजनेता कहां हैं? क्या वे मेरी मदद नहीं करेंगे, क्योंकि मेरा नाम अब मतदाता सूची में नहीं है?’
जिला प्रशासनिक कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में लोग इधर-उधर भटक रहे थे। यहां आने का सभी का कारण अलग-अलग जरूर था, लेकिन लक्ष्य एक ही था- खुद को भारतीय साबित करना।
समस्याएं कैसी-कैसी हैं, यह 36 वर्षीय सीना बीबी के उदाहरण से समझा जा सकता है। उनका नाम मतदाता सूची से इसलिए हटा दिया गया, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आयोग को उनके और उनके पिता की आयु के बीच 50 साल से अधिक का अंतर पाया गया।
मुर्शिदाबाद में सबसे अधिक वोट कटे हैं। अब खुद को इसी जमीन से होने का साबित करने के लिए लोग पुराने से पुराने भूमि रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। जिनके पास वे हैं, वे खुद को भाग्यशाली मानते हैं, लेकिन जो लोग इस तरह के भूमि कागजात नहीं जुटा पा रहे, उनके माथे पर परेशानी स्पष्ट दिखती है।