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… इतिहास मेरे प्रति समकालीन मीडिया की तुलना में ज्यादा उदार होगा: डॉ. मनमोहन सिंह की आ​खिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस

डॉ. मनमोहन सिंह ने बतौर प्रधानमंत्री 3 जनवरी 2014 को अ​पनी आ​खिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने 100 से ज्यादा पत्रकार शामिल थे।

Last Updated- December 27, 2024 | 12:40 PM IST
Dr Manmohan Singh
Dr. Manmohan Singh

Manmohan Singh Last Press Conference : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अब हमारे बीच नहीं हैं। 92 साल की उम्र में उन्होंने 26 दिसंबर 2024 को दिल्ली के एम्स में आ​खिरी सांस ली। डॉ. मनमोहन सिंह ने बतौर प्रधानमंत्री 3 जनवरी 2014 को अ​पनी आ​खिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें 100 से ज्यादा पत्रकार शामिल थे। इस दौरान एक सवाल के जवाब में डॉ. सिंह ने एक बयान दिया जो पिछले एक दशक के बाद सोशल मीडिया पर फिर से छाया हुआ है। ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री की आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी।

अपने मंत्रियों को नियंत्रित करने और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में निर्णायक रूप से कार्य करने में कथित अक्षमता के बारे में पूछे गए एक साल के जवाब में उन्होंने कहा था, “मुझे ईमानदारी से विश्वास है कि इतिहास मेरे प्रति समकालीन मीडिया या संसद में विपक्षी दलों की तुलना की तुलना में ज्यादा उदार होगा।”

उन्होंने आगे कहा था, “मैं सरकार के कैबिनेट सिस्टम में होने वाली सभी चीजों का खुलासा नहीं कर सकता। गठबंधन राजनीति की परिस्थितियों और मजबूरियों को ध्यान में रखते हुए, मैंने परिस्थितियों के अनुसार जितना संभव था, उतना अच्छा किया है।”

बता दें, उस समय, यूपीए-2 सरकार को कई मंत्रालयों में भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों का सामना करना पड़ा, जो 2014 के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की हार का एक प्रमुख कारण था, जिसने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी के सत्ता में आने का रास्ता साफ किया।

डॉ. सिंह की यह टिप्पणी 2014 के चुनावों के बाद पद छोड़ने के अपने फैसले की ऐलान के समय आई। अपने कार्यकाल पर विचार करते हुए, उन्होंने 7.6 फीसदी की औसत आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखते हुए गठबंधन सरकार के प्रबंधन की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जॉब जेनरेशन, महंगाई पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार से निपटने समेत कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार किया।

रूरल इंडिया के लिए हुए फैसलों का किया था उल्लेख   

डॉ. मनमोहन सिंह ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से सवाल-जवाब से पहले अपनी अपनी शुरुआती टिप्प्णी में कहा था, ”2004 में मैंने अपनी सरकार को “ए न्यू डील फार रूरल इंडिया” करने के लिए कमिटेड किया था। मेरा मानना ​​है कि हमने उस वादे को काफी हद तक पूरा किया है। हमने कृषि उपज के लिए समर्थन मूल्य बढ़ाने, किसानों को ऋण देने और बागवानी, ग्रामीण विकास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से सड़कों और बिजली में निवेश बढ़ाने सहित किसान हितैषी नीतियों का पालन किया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ने कृषि श्रमिकों को एक मंजिल का आश्वासन दिया है और उनकी बार्गेनिंग पावर को बढ़ाया है। स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की बेहतर डिलीवरी हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हमारे भाइयों और बहनों को नई उम्मीद दे रही है।”

उन्होंने कहा था, ”इन पहलों ने यह सुनिश्चित किया है कि कृषि सकल घरेलू उत्पाद पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है। भारत खाद्यान्न, चीनी, फल और सब्जियों, दूध और मुर्गी पालन के मामले में दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक बन गया है। ग्रामीण मजदूरी वास्तविक रूप से पहले की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति ग्रामीण वास्तविक खपत चार गुना तेजी से बढ़ी है। इन विकासों के कारण 2004 से 2011 की अवधि में गरीबी रेखा से नीचे की आबादी का प्रतिशत पिछले दस साल की अवधि की तुलना में बहुत तेजी से गिरा है। नतीजतन, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में 13.8 करोड़ की कमी आई है।”

राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार 

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 की रात को नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वह 92 साल के थे। डॉ. सिंह को भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाएगा। उनका भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण में महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। हालांकि, उन्हें इससे ज्यादा कहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए याद किया जाता है। देश की प्रधानमंत्री पद पर अपनी सेवा देने के साथ-साथ वह गृहमंत्री और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर भी अपनी सेवा दे चुके थे।

First Published - December 27, 2024 | 12:40 PM IST

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