facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

सितंबर में भी नहीं थमेगा मानसून: IMD ने दी भारी बारिश की चेतावनी, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका

Advertisement

IMD ने बताया कि अगले दो हफ्तों में मॉनसून के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं। उल्टा, इस दौरान और ज्यादा लो प्रेशर एरिया (LPA) बनने की संभावना है।

Last Updated- August 31, 2025 | 5:39 PM IST
Weather today, Aaj ka mauam
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में इस साल मॉनसून ने जमकर तबाही मचाई है। अगस्त में देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई। अब सितंबर में भी बारिश का जोर कम होने के आसार नहीं हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज अपनी ताजा भविष्यवाणी में कहा कि सितंबर में पूरे देश में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। यह बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) से 109 फीसदी ज्यादा हो सकती है। सितंबर का LPA 167.9 मिलीमीटर है। यह मॉनसून का आखिरी महीना है।

IMD ने बताया कि अगले दो हफ्तों में मॉनसून के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं। उल्टा, इस दौरान और ज्यादा लो प्रेशर एरिया (LPA) बनने की संभावना है। देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। हालांकि, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों, दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि सितंबर में उत्तराखंड में भारी बारिश से भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से कई नदियां निकलती हैं। भारी बारिश से ये नदियां उफान पर आ सकती हैं। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। इसका असर दिल्ली, दक्षिण हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में भी पड़ सकता है। यहां सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

महापात्रा ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी इलाकों में भी भारी बारिश की आशंका है। इससे नदी में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

Also Read: दमदार मानसून और बढ़ी खरीफ बोआई से पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की बढ़ोतरी 3.7% रहने का अनुमान

अगस्त में मानसून ने मचाई भारी तबाही

अगस्त में देश के कई हिस्सों में मानसून ने भारी तबाही मचाई। उत्तर-पश्चिम भारत में इस बार अगस्त में 260.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 34.4 फीसदी ज्यादा है। यह 2001 के बाद सबसे ज्यादा और 1901 के बाद 13वीं सबसे ज्यादा बारिश है। इस क्षेत्र में जून से अगस्त तक कुल 614.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य 484.9 मिलीमीटर से 27 फीसदी ज्यादा है। जून में 111 मिलीमीटर (42 फीसदी ज्यादा) और जुलाई में 237.4 मिलीमीटर (13 फीसदी ज्यादा) बारिश हुई।

दक्षिण भारत में भी अगस्त में 250.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 31 फीसदी ज्यादा है। यह 2001 के बाद तीसरी सबसे ज्यादा और 1901 के बाद आठवीं सबसे ज्यादा बारिश है। जून से अगस्त तक इस क्षेत्र में 607.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य 556.2 मिलीमीटर से 9.3 फीसदी ज्यादा है। पूरे देश में अगस्त में 268.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 5 फीसदी ज्यादा है। जून से अगस्त तक कुल 743.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा है।

इस भारी बारिश का असर खेती पर भी पड़ सकता है। 22 अगस्त तक देश में 107.39 मिलियन हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी। यह पिछले साल की तुलना में 3.54 मिलियन हेक्टेयर ज्यादा है। धान और मक्का की बुआई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। लेकिन सितंबर में ज्यादा बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। खेतों में पानी भरने और फसलों के गिरने का खतरा है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का कहर सबसे ज्यादा दिखा। पंजाब में दशकों बाद सबसे भयानक बाढ़ आई। नदियों और नहरों के उफान से हजारों हेक्टेयर खेत डूब गए। लाखों लोग बेघर हो गए। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल फटने और अचानक बाढ़ से सड़कें और पुल बह गए। जम्मू-कश्मीर में बार-बार बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुईं। IMD का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसून की वजह से बारिश बढ़ी है।

Advertisement
First Published - August 31, 2025 | 5:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement