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भारत-दक्षिण कोरिया का महाप्लान: 2030 तक $50 अरब पहुंचेगा व्यापार, शिपबिल्डिंग में होगा बड़ा निवेश

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भारत और दक्षिण कोरिया ने 2030 तक व्यापार $50 अरब पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। दोनों देशों के बीच पोत निर्माण, रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में सहयोग के लिए 25 अहम समझौते हुए

Last Updated- April 20, 2026 | 10:56 PM IST
South Korean President Lee Jae Myung
सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में संयुक्त प्रेस बयान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग | फोटो: PTI

पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष समेत हालिया वैश्विक घटनाक्रम से उत्पन्न अनिश्चितता का सामना करते हुए दक्षिण कोरिया और भारत ने सोमवार को अपने द्विपक्षीय व्यापार को लगभग दोगुना कर 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर दोबारा बातचीत शामिल होगी। इसके अलावा दोनों देशों ने रणनीतिक उद्योगों, विशेषकर जहाज निर्माण में सहयोग को गहरा करने का संकल्प जताया है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यांग अपने मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं वाले एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रविवार को तीन दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और दोनों पक्षों के व्यापारिक नेताओं के साथ दोपहर भोज भी किया।

दोनों पक्षों ने 25 नतीजों की सूची सामने रखी। यह भी कहा गया कि दोनों देश आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज, रक्षा, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन और नागरिक परमाणु ऊर्जा, विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) के विकास और अगली पीढ़ी की बैटरियों के विकास में सहयोग बढ़ाएंगे।

भारत भी दक्षिण कोरिया को इस्पात निर्यात बढ़ाने का इच्छुक है और इसके लिए संवाद स्थापित किया गया है। रक्षा क्षेत्र में, भारत एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल प्रणालियों सहित अन्य रक्षा उपकरणों के आयात और संयुक्त उत्पादन पर विचार कर रहा है। रक्षा स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने के लिए एक दक्षिण कोरिया-भारत डिफेंस एक्सिलरेटर स्थापित किया गया है।

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के साथ संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कोरियाई कंपनियों, खासकर छोटे और मझोले उपक्रमों के भारत में प्रवेश को सुविधा देने के लिए हम एक कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप स्थापित करेंगे। इसके अलावा अगले वर्ष तक हम भारत- कोरिया व्यापार समझौते का उन्नयन करेंगे।’

दोनों नेताओं ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया के संघर्ष का उल्लेख किया। ली ने कहा, ‘इस अनिश्चितता के दौर में, दक्षिण कोरिया और भारत पारस्परिक विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ सहयोगी साझेदार बन सकते हैं।’

मोदी ने कहा, ‘वैश्विक तनाव के इस समय में, भारत और कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि साझा प्रयासों के माध्यम से भारत और दक्षिण कोरिया एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान करते रहेंगे।

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत अपनी जहाज निर्माण क्षमताओं का विस्तार करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। भारत के अधिकारियों ने कहा कि दक्षिण कोरिया के पास जहाज निर्माण तकनीक है और भारके साथ अगली पीढ़ी के जहाज निर्माण की दिशा में काम किया जा सकता है।

जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए उनमें से एक के तहत एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर इंजीनियरिंग दक्षिणी भारत में एक ‘बड़े ग्रीनफील्ड शिपयार्ड’ का विकास करेगी। इसके लिए पूंजी समुद्र विकास कोष से आ सकती है। इसके साथ ही पूरा ध्यान मौजूदा शिपयार्ड को उन्नत करने, ब्लॉक निर्माण सुविधाओं में सुधार करने और बड़े तथा विशेष जहाजों के निर्माण के लिए एक नया ड्राई डॉक स्थापित करने पर होगा।

भारत शिपबिल्डिंग में कौशल प्रशिक्षण के लिए भी दक्षिण कोरिया की मदद चाहता है, जो कोरिया इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी द्वारा प्रदान किया जाएगा। बंदरगाह अधोसंरचना के विकास, ज्ञान साझा करने, श्रमिकों को प्रशिक्षित करने और इन पहलों के वित्तपोषण में भी सहयोग होगा।

भारत व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर दोबारा बातचीत के लिए उत्सुक है। इस पर दोनों देशों ने 2010 में हस्ताक्षर किए थे ताकि प्रतिकूल व्यापार संतुलन को ठीक किया जाए। जब इस पर हस्ताक्षर हुए थे तब भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय व्यापार 14 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 27 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें भारत का दक्षिण कोरिया से आयात लगभग 18.5 अरब डॉलर है।

भारत को उम्मीद है कि सेपा का उन्नत स्वरूप उसकी गैर-शुल्क बाधाओं से संबंधित चिंताओं को दूर करेगा, उसके सेवा निर्यात को बढ़ाएगा और व्यापार प्रवाह को संतुलित करेगा। अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री की अगली दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर हो सकता है।

निवेश के मुद्दे पर भारतीय अधिकारियों ने कहा कि सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों ने भारत में दक्षिण कोरियाई निवेश के पहले चरण का नेतृत्व किया था। कोरियाई निवेश का दूसरा चरण कोरियाई लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) द्वारा संचालित किया जाएगा। वार्ता के दौरान दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि भारत में केवल 700 कोरियाई कंपनियां मौजूद हैं, जबकि यह संख्या शायद दस गुना अधिक होनी चाहिए थी।

दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल ने एसएमई से संबंधित कई मुद्दों को चिह्नित किया जिन पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि भारत में निवेश सुगम हो सके।  दोनों पक्षों को उम्मीद है कि एसएमई निवेश 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

दोनों पक्षों ने एक औद्योगिक सहयोग समिति स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की, जिसकी अध्यक्षता संबंधित उद्योग मंत्रियों द्वारा की जाएगी, ताकि निवेश और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जा सके। भारत और दक्षिण कोरिया ने वित्तीय प्रवाह को सुगम बनाने के लिए एक वित्तीय मंच और ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ की शुरुआत की।

ली आठ वर्षों में भारत का दौरा करने वाले पहले दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति हैं। जबकि प्रधानमंत्रभ् मोदी ने आखिरी बार फरवरी 2019 में दक्षिण कोरिया का दौरा किया था।

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First Published - April 20, 2026 | 10:22 PM IST

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