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अनुसंधान व शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनेगा भारत, विदेशी यूनिवर्सिटियों को न्योता

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वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, राज्य सरकारों के सुधार और स्पष्ट नियम उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए अहम

Last Updated- December 18, 2025 | 8:21 AM IST
It is necessary to reduce business costs: Nageshwaran

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि अगर राज्य सरकारों के सुधारों को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत मिली गति को आगे बढ़ाया जाता है तो अनिश्चितता वाली दुनिया में भारत शिक्षा, अनुसंधान और विचारों का नया वैश्विक केंद्र बन सकता है।

यह नीति ऐसे समय आई है, जब वैश्विक उच्च शिक्षा का परिदृश्य नया रूप ले रहा है और पारंपरिक शैक्षणिक केंद्रों को जनसांख्यिकीय गिरावट, राजकोषीय दबाव और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर कड़ी राजनीतिक पाबंदियों से जूझना पड़ रहा है। नागेश्वरन ने नई दिल्ली में 15वें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) वैश्विक उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा, ‘एशिया शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत के पास मुख्य रूप से छात्रों का केंद्र होने से लेकर वैश्विक शिक्षार्थियों और विद्वानों के लिए एक गंतव्य बनने का एक दुर्लभ अवसर है।’

सीईए ने केंद्र सरकार के 2023 के सुधारों का हवाला दिया, जिसमें विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) को भारत में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति दी गई है। यह यह उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण का एक उदाहरण है जिसका लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह एक नियमित नियामक बदलाव नहीं था। यह दुनिया और खुद को एक संकेत था कि भारत अपनी शर्तों पर वैश्विक शिक्षा जगत के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।’

बहरहाल सीईए ने कहा कि अगर भारत को वास्तव में उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण करना है तो नियमों में स्पष्टता और पूर्वानुमान, एक्रेडिएशन, डिग्री की मान्यता और व्यवस्था से निकलने के मानक में स्पष्टता अहम हैं। उन्होंने कहा, ‘छात्र वीजा, आवास, परिसर की सुरक्षा, अनुसंधान संबंधी बुनियादी ढांचा और विश्वविद्यालयों में पेशेवर प्रशासन का वातावरण भी होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों को प्रतिस्पर्धा करने, सहयोग करने और सीखने देने को लेकर सरकार को भरोसा होना चाहिए और वैश्विक साथियों के सीखने में भी योगदान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे विदेशी विश्वविद्यालय और छात्र दोनों भारत को न केवल एक सांस्कृतिक अनुभव के रूप में देखेंगे बल्कि एक गंभीर शैक्षणिक केंद्र के रूप में भी देखेंगे।

नागेश्वरन ने कहा, ‘अच्छी तरह से किए जाने से मानक बढ़ सकते हैं, विदेशी मुद्रा की कमाई हो सकती है। इससे सॉफ्ट पावर को मजबूती मिल सकती है और भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं।’जनसांख्यिकीय और आर्थिक बदलाव के मोड़ पर खड़ा है और इसमें उच्च शिक्षा एक निर्णायक भूमिका निभाएगी, क्योंकि लाखों युवा अगले 2 दशकों में कार्यबल में प्रवेश करने के लिए तैयार हो रहे हैं।भारत में उच्च शिक्षा काफी हद तक राज्य सरकारों द्वारा दी जाती है या उनके नियमन में आती है।

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First Published - December 18, 2025 | 8:21 AM IST

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