भारत वैश्विक वित्तीय सेवा उद्योग के लिए तेजी से एक प्रमुख टैलेंट हब के रूप में उभर रहा है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी कॉलियर्स की ‘Global Financial Services Markets: Top Talent Locations 2026’ नामक रिपोर्ट में यह पाया गया कि वित्तीय सेवाओं की लोकेशन रणनीतियां बदल रही हैं क्योंकि कंपनियां टैलेंट तक पहुंच, लागत प्रतिस्पर्धा और तेजी से बदलती तकनीक के बीच संतुलन बना रही हैं, जबकि स्थापित वैश्विक हब उद्योग को आधारभूत रूप से संभाले हुए हैं। 200 से अधिक वैश्विक बाजारों के विश्लेषण पर आधारित यह रिसर्च उन वित्तीय बाजारों को उजागर करता है, जहां टैलेंट की गहराई, निवेश गतिविधि और दीर्घकालिक विकास संभावनाएं एक साथ मिल रही हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार भारत वित्तीय सेवाओं के लिए एक प्रमुख टैलेंट हब के रूप में उभरकर सामने आया है। जिसमें मुंबई “Global Centre” के रूप में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। दिल्ली एनसीआर एक अग्रणी “Strategic Centre” के रूप में उभर कर सामने आया है, जबकि बेंगलूरु को वैश्विक स्तर पर शीर्ष “Domestic & Operational Centre” के रूप में पहचाना गया है।
कॉलियर्स इंडिया में ऑफिस सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्पित मेहरोत्रा के अनुसार भारत तेजी से वैश्विक वित्तीय सेवा हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, गहरी टैलेंट पूल, तकनीकी विशेषज्ञता और परिचालन क्षमता के साथ जैसे-जैसे कंपनियां अपने वैश्विक मुख्यालय और डिलीवरी सेंटर से बाहर भी अवसर तलाश रही हैं, भारतीय शहर रणनीतिक और उच्च-मूल्य वाले व्यवसायिक कार्यों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। यही कारण है कि मुंबई, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु शीर्ष 30 वैश्विक वित्तीय सेवा टैलेंट केंद्रों की सूची में शामिल हैं। इसके अलावा, अग्रणी वैश्विक और घरेलू BFSI फर्मों से बढ़ती ऑफिस स्पेस की मांग के कारण अगले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र कुल ऑफिस मांग का 15-20% हिस्सा हो सकता है।
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इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के प्रमुख कार्यालय बाजार वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा (BFSI) क्षेत्र की कंपनियों की बढ़ती रियल एस्टेट उपस्थिति, मजबूत टैलेंट उपलब्धता और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठा रहे हैं। मुंबई देश का प्रमुख वित्तीय केंद्र बना हुआ है, जबकि दिल्ली एनसीआर, बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे शहर लागत लाभ, बड़े प्रतिभा आधार और तेजी से विकसित हो रहे कारोबारी पारिस्थितिकी तंत्र के कारण वित्तीय सेवा कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में विशेष कौशल और बड़े पैमाने पर प्रतिभा की बढ़ती मांग के बीच भारतीय शहर वित्तीय सेवाओं के लिए प्रमुख क्षेत्रीय टैलेंट हब बनने की मजबूत स्थिति में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनियां तेजी से डेटा-आधारित निर्णय लेने की ओर बढ़ रही हैं। बदलते कारोबारी माहौल में संगठन अपने कार्यबल और लोकेशन रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए बाजार संबंधी आंकड़ों और विश्लेषण का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
कॉलियर्स के एशिया पैसिफिक ऑक्यूपायर सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर माइक डेविस ने कहा कि जैसे-जैसे कंपनियां अपनी टैलेंट और रियल एस्टेट रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं, बाजार संबंधी डेटा और इनसाइट्स तक पहुंच पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तथ्य-आधारित रणनीति अपनाने वाली कंपनियां प्रतिभाओं को आकर्षित करने और विकास के अवसरों का लाभ उठाने में बेहतर स्थिति में होंगी। हमारा मानना है कि वित्तीय सेवाओं की वैश्विक डिलीवरी का मॉडल अधिक वितरित और लचीला होगा, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र भविष्य की वृद्धि के केंद्र में रहेगा।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का वित्तीय सेवा बाजार लगातार अधिक विविध और परिपक्व बन रहा है। प्रमुख शहर एक ओर फ्रंट-ऑफिस क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिक जटिल और उच्च-मूल्य वाले कार्यों की ओर भी बढ़ रहे हैं। डिजिटलीकरण और एआई के बढ़ते उपयोग से यह बदलाव और तेज हो रहा है, जिससे वित्तीय सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यस्थल मॉडल और मांग के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्लेषण में शामिल वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनियों में एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र की हिस्सेदारी 39% रही, जो किसी भी क्षेत्र के मुकाबले सबसे अधिक है। यह वैश्विक वित्तीय सेवा उद्योग में एपीएसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। इस क्षेत्र की ताकत केवल कंपनियों की संख्या तक सीमित नहीं है। रैंकिंग में शामिल वैश्विक टैलेंट केंद्रों में लगभग 36% हिस्सेदारी एपीएसी की रही।
वहीं, घरेलू और परिचालन केंद्रों के मामले में भी एपीएसी का दबदबा रहा, जहां रैंकिंग में शामिल 44% बाजार इसी क्षेत्र से थे। सिंगापुर, बीजिंग, शंघाई, हांगकांग और टोक्यो जैसे प्रमुख एशियाई शहरों के साथ-साथ भारत के मुंबई, बेंगलूरु और दिल्ली-एनसीआर भी दुनिया के अग्रणी वित्तीय सेवा केंद्रों में शामिल हैं। इन शहरों ने वेंचर कैपिटल (वीसी) फंडिंग, श्रम क्षमता और उद्योग उत्पादन जैसे प्रमुख मानकों पर मजबूत प्रदर्शन किया है।