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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की मजबूत कूटनीतिक पहल

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मोदी सरकार ने वैश्विक मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया, कई देशों से मिला समर्थन

Last Updated- May 08, 2026 | 9:05 AM IST
Operation Sindoor
Representational Image

मई 2025 के तीसरे सप्ताह से ही भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहल बेहद तीव्र रही है। उसके बाद उसने कम से कम 19 राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की मेजबानी की है, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से तीन भी शामिल हैं। इसके अलावा कई प्रमुख देशों के विदेश मंत्री भी भारत की यात्रा पर आए। तब से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 देशों की यात्रा की है और वे मई के मध्य में यूरोप के छह दिवसीय दौरे पर निकलने वाले हैं जिसमें नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल होंगे। इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात में भी उनका संक्षिप्त ठहराव होगा।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद और 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई रुकने के बाद भारत की कूटनीतिक गतिविधियों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वक्तव्यों में पाकिस्तान द्वारा जारी सीमा पार आतंकवाद के प्रायोजन को प्रमुखता से उठाया है। अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे भारतीय उत्पादों के संदर्भ में भारतीय कूटनीति ने अधिक उचित व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करने और अपने निर्यात के लिए नए बाजार तलाशने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। हालांकि, वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करना चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के नेतृत्व, विशेषकर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अभूतपूर्व दखल प्रदान किया। लेकिन सरकारी सूत्रों ने यह इंगित किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत को अमेरिका का समर्थन प्राप्त हुआ है।

18 जुलाई को अमेरिकी विदेश विभाग ने द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को एक विदेशी आतंकी संगठन और विशेष रूप से वैश्विक आतंकी समूह घोषित किया। टीआरएफ पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही प्रॉक्सी है। वह 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए घृणित हमले सहित कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। उसने पहलगाम हमले की दो बार जिम्मेदारी भी ली। बुधवार को एक संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की यात्रा पर आए वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम का धन्यवाद किया क्योंकि उन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत का समर्थन किया था।

भारत को आतंकवाद के विरुद्ध अपनी लड़ाई में यूरोपीय संघ, कनाडा, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, यूके, फ्रांस, रूस और कई अन्य देशों का समर्थन मिला। विगत 12 महीनों में इन देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भारत आए हैं। मई के अंत तक भारत ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मेजबानी कर लेगा। इनमें रूस के सर्गेई लावरोव भी शामिल हैं। और साथ ही भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन भी आयोजित होगा। प्रधानमंत्री ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जिसे पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के कारण स्थगित करना पड़ा था।

पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ सैन्य अभियान की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ‘हमारी सेनाओं के बीच बढ़ती संयुक्तता को प्रदर्शित करता है और यह रेखांकित करता है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की भारत की खोज ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी मजबूती दी है।‘ प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया। इसने हमारी सशस्त्र सेनाओं के पेशेवराना कौशल, तैयारी और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, ‘आज एक साल बाद हम आतंकवाद को परास्त करने और उसे उचित माहौल देने वाले तंत्र को नष्ट करने के लिए पहले की तरह ही प्रतिबद्ध हैं।’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई को मजबूती देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ‘आज हम ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मना रहे हैं। पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे पहलगाम में आतंकी हमला किया गया। हमने भी सीमा पार आतंकवाद को पालने के लिए पाकिस्तान को सटीक जवाब दिया।’

उन्होंने कहा, ‘दुनिया जानती है कि सीमा पार आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की नीति का एक साधन रहा है। भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। ‘विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘भारत ने अपने निर्णायक कदमों से आतंकवादी कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की। और यह स्पष्ट किया कि शांति और सुरक्षा के लिए इतना गंभीर खतरा प्रभावी रूप से परास्त किया जाएगा।’ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘मजबूत और दृढ़’ खड़ा है ताकि ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता’ का संदेश दिया जा सके। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने घोषणा की कि उसने 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। गुरुवार को जायसवाल ने कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख सुसंगत है।

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के निरंतर प्रायोजन के जवाब में सिंधु जल संधि को स्थगित किया गया है। पाकिस्तान को विश्वसनीय रूप से सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को बंद करना होगा।’ कांग्रेस ने भारत की सशस्त्र सेनाओं की उपलब्धियों को सलाम किया, लेकिन साथ ही सरकार की ‘व्यापक कूटनीतिक पहल’ के बावजूद पाकिस्तान को अलग-थलग करने में असमर्थता को भी रेखांकित किया।

कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान को 2008 मुंबई आतंकी हमले के बाद की तरह अलग-थलग नहीं किया गया, बल्कि इसके विपरीत, इसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का जून 2025 के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा असाधारण गर्मजोशी से स्वागत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक पाकिस्तान अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान से तारीफ पा रहा है।

रमेश ने कहा कि ऑपरेशन को अप्रत्याशित रूप से रोकने वाली युद्धविराम की पहली घोषणा 10 मई 2025 को शाम 5 बजकर 37 मिनट पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा की गई थी, जिन्होंने दावा किया कि यह ट्रंप के हस्तक्षेप से संभव हुआ। कांग्रेस नेता ने यह भी इंगित किया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद के हफ्तों में तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में और 10 जून 2025 को जकार्ता में भारत के डिफेंस अटैची ने संघर्ष में भारत की हानियों पर टिप्पणी की थी। रमेश ने कहा कि जुलाई 2025 में उप-थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में चीन की गहरी भूमिका की ओर स्पष्ट ध्यान आकर्षित किया। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मोदी सरकार का चीन के प्रति समर्पण लगातार जारी है, जिसमें लद्दाख में पारंपरिक गश्ती अधिकारों को हानि, रिकॉर्ड चीनी आयात, एफडीआई मानदंडों में ढील आदि शामिल हैं।’

उन्होंने कहा कि जुलाई 1999 में करगिल युद्ध समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने चार सदस्यीय कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता देश के रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम ने की थी जो वर्तमान विदेश मंत्री के पिता हैं। इस समिति ने 7 जनवरी 2000 को ‘फ्रॉम सरप्राइज टू रेकनिंग’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। यह रिपोर्ट 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश की गई थी।

भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहल में सभी दलों के प्रतिनिधिमंडलों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजना और 64 देशों के लिए संसदीय मैत्री समूहों का पुनर्जीवन भी शामिल था।

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First Published - May 8, 2026 | 9:05 AM IST

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