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भारत में 10 लाख हाई-टेक इंजीनियरों की जरूरत, मगर IT कंपनियों को नहीं मिल रहे काबिल लोग

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तकनीकी सेवाएं देश के 3 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 7.5 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।

Last Updated- July 11, 2024 | 4:55 PM IST
एआई से श्रम बल पर अनिश्चितता के बादल, अवसर या जोखिम?, Economic Survey 2024: AI clouds uncertainty over labor force, opportunity or risk?

एक समय में सॉफ्यवेयर इंजीनियर की काफी इज्जत होती थी, मगर आज के समय में तो IIT जैसे संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं को भी नौकरी नहीं मिल रही है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यह दौर इंजीनियरों को एक बार फिर से उनका खोया हुआ रुतबा वापस लौटा सकता है।

एक उद्योग निकाय का अनुमान है कि भारत के प्रौद्योगिकी सेक्टर (technology sector) को अगले 2-3 वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य क्षमताओं में एडवांस कौशल वाले 10 लाख से ज्यादा इंजीनियरों की आवश्यकता होगी। मगर यह मांग तब तक पूरी नहीं होगी जब तक सरकार शिक्षा और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण रूप से सुधार नहीं करती है।

मौजूदा वर्कफोर्स को फिर से कुशल बनाने की जरूरत

समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस (NASSCOM) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा कि इस सेक्टर को एआई (AI), बिग डेटा एनालिटिक्स (big data analytics) और साइबर-सुरक्षा (cyber-security) जैसे क्षेत्रों में नौकरियां लेने के लिए अपने मौजूदा वर्कफोर्स के आधे से अधिक को फिर से कुशल बनाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, नए कॉलेज ग्रेजुएट आवश्यक एडवांस तकनीकी नौकरियों में से केवल एक चौथाई को ही भरने में सक्षम होंगे।

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वर्कफोर्स को लगातार अप-स्किलिंग की जरूरत

गुप्ता ने सोमवार को एक इंटरव्यू में कहा, “वर्कफोर्स की रोजगार क्षमता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए उचित मात्रा में काम की आवश्यकता होगी। उद्योग केवल एक बार अप-स्किलिंग से काम नहीं चला सकता, इसे तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के बीच लगातार कौशल में सुधार की अपनी यात्रा जारी रखनी होगी।”

भारत का 250 अरब डॉलर का टेक सेक्टर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो लगभग 54 लाख लोगों को रोजगार देता है। तकनीकी सेवाएं देश के 3 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 7.5 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।

कुशल आईटी इंजीनियरों की कमी से भारतीय आईटी कंपनियों को हो सकता है नुकसान

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (TCS) जैसी आईटी कंपनियां वर्कफोर्स के कौशल और नौकरी पर उनकी आवश्यकता के बीच व्यापक बेमेल के कारण पदों को भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स कॉर्प (Machines Corp) और एक्सेंचर पीएलसी (Accenture Plc) जैसे वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले नुकसान होने का खतरा है।

TCS ने पिछले महीने कहा था कि कौशल की कमी के कारण वह 80,000 पदो को भरने में असमर्थ है। मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में एआई पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड ने जून में कहा था कि उसकी आईटी और आईटी-सक्षम सेवा इकाई में 20,000 इंजीनियरों की कमी है।

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स्कूली शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत

गुप्ता ने कहा कि भारत के कौशल अंतर की जड़ देश की निचली कक्षा से लेकर हाई स्कूल तक की खराब स्कूली शिक्षा प्रणाली में निहित है। उन्होंने कहा कि कॉलेज छात्रों को पर्याप्त व्यावहारिक कौशल (practical skills) प्रदान नहीं करते हैं, जो नौकरी बाजार के लिए आवश्यक हैं।

Nasscom का अनुमान है कि 2028 में डिजिटल प्रतिभा के लिए मांग और आपूर्ति का अंतर मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 29 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है।

ये टिप्पणियां RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जैसे जाने-माने अर्थशास्त्रियों की चेतावनियों को रेखांकित करती हैं, जो कहते हैं कि भारत की खराब स्कूली शिक्षा एक ऐसे देश में विकास की संभावनाओं में बाधा बनेगी जहां 1.4 अरब से ज्यादा आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है।

एक हालिया रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमान है कि उच्च शिक्षित युवाओं के बेरोजगार होने की संभावना उन लोगों की तुलना में अधिक है जिनके पास कोई स्कूली शिक्षा नहीं है।

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First Published - July 11, 2024 | 4:55 PM IST

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