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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर मुहर: 100% शुल्क-मुक्त पहुंच, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुला

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भारत लगभग 70 फीसदी उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त बाजार खोलेगा लेकिन संवेदनशील डेरी, चीनी और खाद्य तेलों को सुरक्षा दी जाएगी

Last Updated- April 27, 2026 | 11:01 PM IST
india new zealand fta (1)
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैकले

भारत और न्यूजीलैंड ने आज व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। यह करार साल के अंत तक लागू हो जाएगा। इसके तहत भारत को न्यूजीलैंड में 100 फीसदी शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच, 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का वादा और श्रमिकों की आसान आवाजाही की सुविधा मिलेगी।

न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैकले ने भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘कल (मंगलवार को) न्यूजीलैंड में हमारी संसद में इस समझौते को एक विश्लेषण के साथ पेश किया जाएगा। इसके बाद इसे प्रवर समिति के पास भेजा जाएगा, जहां आम जनता और अन्य लोग अपनी राय दे सकते हैं तथा संसद में आकर अपनी बात रख सकते हैं। फिर हम इस समझौते को लागू करने वाला विधेयक संसद में पेश करेंगे। उम्मीद है कि यह जल्द पारित हो जाएगा और साल के अंत तक हम इसे लागू कर पाएंगे।’

गोयल ने कहा, ‘एफटीए भारत में ज्यादा निवेश, बाजार तक व्यापक पहुंच और सेवाओं में मजबूत सहयोग के जरिये सभी क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा। यह वास्तव में ऐतिहासिक कदम है जो हमारी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।’

पिछले 5 वर्षों में भारत द्वारा किया गया यह सातवां एफटीए है। इससे पहले मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के देशों, ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार करार पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

एफटीए के लागू होने की शुरुआत से ही 100 फीसदी उत्पादों पर शुल्क हटाए जाने से भारतीय कपड़ा, परिधान, चमड़ा, कालीन, सिरैमिक, इंजीनियरिंग सामान और वाहन कलपुर्जा क्षेत्र को फायदा होगा। भारत लगभग 70 फीसदी उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त बाजार खोलेगा लेकिन संवेदनशील डेरी, चीनी और खाद्य तेलों को सुरक्षा दी जाएगी।

सेब, कीवी फल, शहद का आयात कोटा सीमा, न्यूनतम कीमतों और सुरक्षा शर्तों के तहत ही किया जाएगा। न्यूजीलैंड के सेबों को रियायती शुल्क का लाभ केवल अप्रैल से अगस्त तक ही मिलेगा जिसमें कोटा के भीतर शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाएगा और इसका न्यूनतम आयात मूल्य 1.25 डॉलर प्रति किलोग्राम से अधिक होना चाहिए।

न्यूजीलैंड की वाइन को कीमत के आधार पर शुल्क में छूट मिलेगी। 5 डॉलर प्रति 750 मिलीलीटर वाली बोतल से कम कीमत वाली वाइन को कोई रियायत नहीं मिलेगी और उस पर 150 फीसदी शुल्क बरकरार रहेगा।

5 डॉलर से 15 डॉलर के बीच कीमत वाली वाइन पर शुल्क समझौता लागू होने पर घटकर 100 फीसदी तरह जाएगा और फिर 10वें साल तक धीरे-धीरे 50 फीसदी रह जाएगा। 15 डॉलर या उससे अधिक कीमत वाली वाइन पर शुल्क 150 फीसदी से घटकर 75 फीसदी और फिर 10वें साल तक 25 फीसदी रह जाएगा।

एफटीए के तहत भारत को सामान के मुकाबले सेवाओं से ज्यादा फायदा मिल सकता है। न्यूजीलैंड ने 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धता जताई है और 139 क्षेत्रों में बिना किसी भेदभाव के सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा दिया है।

एफटीए भारतीयों के लिए न्यूजीलैंड आने-जाने के नए रास्ते खोलता है, जिसमें छात्रों के लिए 20 घंटे काम करने का अधिकार, पढ़ाई के बाद वीजा, 5,000 कुशल कामगारों के लिए जगह और हर साल 1,000 वर्क ऐंड हॉलिडे वीजा शामिल हैं। भारत ने 106 क्षेत्रों में सेवाओं के लिए बाजार पहुंच दी है और 45 क्षेत्रों में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा दिया है।

गोयल ने कहा, ‘सेवाओं के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में सेवाओं का निर्यात 400 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। हालांकि हम न्यूजीलैंड को केवल 65 करोड़ से 70 करोड़ डॉलर की सेवाएं ही निर्यात करते हैं। यहां भी, हमें एक बड़ी छलांग लगाने का अवसर दिखाई देता है।’

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से भारत को प्रशांत क्षेत्र के एक छोटे लेकिन समृद्ध बाजार तक बेहतर पहुंच मिलती है लेकिन वस्तुओं के निर्यात से होने वाला फायदा सीमित हो सकता है। न्यूजीलैंड द्वारा 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश के वादे को सावधानी से देखना चाहिए। पिछले 25 वर्षों में भारत में न्यूजीलैंड का असल निवेश 1 अरब डॉलर से भी कम रहा है।’

न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क केवल 2.3 फीसदी है जबकि भारत का 16.2 फीसदी है। इसके अलावा न्यूजीलैंड की 58.3 फीसदी उत्पाद पहले से ही शुल्क-मुक्त हैं। इसका अर्थ है कि एफटीए से पहले भी भारतीय निर्यातकों की न्यूजीलैंड के बाजार तक व्यापक पहुंच थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘हमारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल न्यूजीलैंड के भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश प्रतिबद्धता के साथ तालमेल बिठाती है और एक जीवंत साझेदारी प्रदान करती है। यह स्टार्टअप परिवेश, उद्यमियों, नवाचार करने वालों, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और एमएसएमई को समर्थन देगी, जिससे रोजगार सृजन और नवाचार आधारित वृद्धि को नई ऊर्जा मिलेगी।’

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक बयान में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में यह एफटीए दोनों पक्षों की ओर से स्थिर, अनुमानित और नियमों पर आधारित व्यापार के प्रति एक स्पष्ट प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा, ‘न्यूजीलैंड के लिए यह एफटीए दुनिया के सबसे गतिशील बाजारों में से एक का दरवाजा खोलता है और व्यापार, निवेश, नवाचार और जुड़ाव के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करता है।’

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First Published - April 27, 2026 | 10:43 PM IST

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