सरकार ने गुरुवार को बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से रह रहे उसके नागरिकों की राष्ट्रीयता के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सहयोग करने को कहा। भारत ने कहा कि अवैध प्रवासियों को वापस भेजने में बांग्लादेश को सहयोग करना चाहिए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने तीस्ता नदी जीर्णोद्धार परियोजना के लिए चीन से औपचारिक रूप से सहयोग और समर्थन मांगा है। मगर नई दिल्ली का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियों के साझा क्षेत्र पर हो रही चर्चा केवल दोनों पक्षों से ही जुड़ी है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत और बांग्लादेश 54 नदियों को साझा करते हैं और जल संबंधी सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संरचित द्विपक्षीय तंत्र है जिसकी नियमित अंतराल पर बैठकें होती रहती हैं।
बांग्लादेश से भारत में अवैध प्रवासन और भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि इसके लिए बांग्लादेश के सहयोग की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,‘बांग्लादेश के पास राष्ट्रीयता सत्यापन के 28,62 से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें कुछ पांच साल से भी अधिक पुराने हैं।’ जायसवाल ने कहा कि भारत की हमेशा यह नीति रही है कि यहां रह रहे सभी अवैध विदेशी नागरिकों को कानूनों, प्रक्रियाओं और स्थापित द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार स्वदेश वापस भेजा जाना चाहिए।
हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने कहा था कि 26 अप्रैल 2026 को असम में 20 विदेशी नागरिक पकड़े गए जिन्हें बांग्लादेश वापस भेज दिया गया। हालांकि शर्मा ने यह नहीं बताया कि ये विदेशी नागरिक कहां पकड़े गए थे। उन्होंने कहा,‘असम लड़ेगा और शरणार्थियों को वापस भेजने का सिलसिला जारी रहेगा।’
हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में असम और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद जब बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से भारत द्वारा कुछ व्यक्तियों को बांग्लादेश ‘धकेलने’ की खबरों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा,‘ असम के मुख्यमंत्री ने इसी तरह की बातें कही थीं और कहा कि उन्होंने कुछ ऐसी कार्रवाई की है। आपने देखा कि हमने कड़ा विरोध किया था। हम इस मुद्दे पर जो भी जरूरी होगा वह किया जाएगा।’
रहमान ने बुधवार को बेइजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की जहां दोनों ने तीस्ता नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर भी चर्चा की। यह नदी पूर्वी हिमालय से निकल कर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। खबरों के मुताबिक वांग ने बांग्लादेश की नई सरकार के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए बांग्लादेश की आधिकारिक समाचार एजेंसी को बताया कि चीन उच्च गुणवत्ता वाली बेल्ट ऐंड रोड सहयोग परियोजनाओं को बांग्लादेश की राष्ट्रीय विकास रणनीतियों के साथ जोड़ने और अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और जन-समुदाय आदान-प्रदान जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चीन के उद्यमों को बांग्लादेश में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। पिछले महीने रहमान भारत भी आए थे।