facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

TARA Weapon System: भारत की स्वदेशी मारक क्षमता में बड़ी छलांग, ‘तारा’ हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण

Advertisement

भारत ने स्वदेशी 'तारा' हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण कर अपनी सैन्य शक्ति को नई ऊंचाई दी है। यह तकनीक पारंपरिक बमों को लंबी दूरी के सटीक हथियारों में बदल देती है

Last Updated- May 08, 2026 | 10:28 PM IST
TARA Weapon System
फोटो क्रेडिट: DRDO

ऑपरेशन सिंदूर के ठीक एक साल बाद भारत ने ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट पर ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन’ (तारा) हथियार प्रणाली के पहले सफल परीक्षण के साथ, अपनी स्वदेशी मारक क्षमता में एक और निर्णायक छलांग का प्रदर्शन किया। रक्षा अधिकारियों ने आज इसकी जानकारी दी। ऑपरेशन सिंदूर ने देश की सैन्य रणनीति में व्यापक बदलाव लाया था और दूर से सटीक हमला करने की क्षमता (स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन वॉरफेयर) की दिशा में महत्त्वपूर्ण दक्षता दिखाई थी।

यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के सहयोग से एयर-बॉर्न प्लेटफॉर्म से किया गया। एक रक्षा अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस पहले परीक्षण ने न केवल विंग्ड ग्लाइड कॉन्फिगरेशन के एरोडायनामिक को प्रदर्शित किया बल्कि हथियार के नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण आर्किटेक्चर को भी प्रमाणित किया।‘

फाइबर-ऑप्टिक जाइरो आधारित इनर्टियल नेविगेशन मल्टी-जीएनएसएस गाइडेंस और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इमेजिंग इन्फ्रारेड टर्मिनल के साथ मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट के तौर पर डिजाइन किया गया ‘तारा’ लड़ाकू विमानों को काफी सुरक्षित दूरी से दुश्मन की जमीन पर मौजूद अहम ठिकानों को सटीक निशाने के साथ नष्ट करने में सक्षम बनाता है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तारा को हैदराबाद की रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। यह भारत का पहला स्वदेशी मॉड्यूलर ग्लाइड हथियार है जो पारंपरिक बिना गाइड वाले वॉरहेड को लंबी दूरी के सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों में बदल सकता है। इस सफल परीक्षण ने भारत की स्वदेशी रूप से किफायती लेकिन अत्यधिक प्रभावी सटीक मारक क्षमता वाले हाथियार विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कीर्तिमान कायम किया है। यह कम लागत वाली प्रणाली मौजूदा हवाई हथियारों की परिचालन पहुंच, सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ाएगी।

Also Read: गुजरात में ग्रीन एनर्जी के लिए सरकार का बड़ा प्लान, 21.5 गीगावाट परियोजनाओं के लिए निकले बड़े टेंडर

एक रक्षा वैज्ञानिक ने कहा, ‘तारा अत्याधुनिक, कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। यह वायु सेना को काफी उच्च सटीकता के साथ सामरिक लक्ष्यों को भेदने की क्षमता प्रदान करेगा। साथ ही पायलटों और विमानों को दुश्मन के रडार-निर्देशित मिसाइल प्रणालियों के संपर्क में आने के खतरे को भी कम करेगा।‘

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इमेजिंग इन्फ्रारेड टर्मिनल मार्गदर्शन का समावेश विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में भी काम कर सकता है जब सैटेलाइट नेविगेशन को खराब या जाम किया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह सफल परीक्षण हाल के संघर्षों से सबक लेकर आंतरिक क्षमता विकसित करने के भारत के प्रयास को मजबूत करता है।

भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी एन के सामल ने कहा, ‘आधुनिक युद्धक्षेत्रों में यह क्षमता जरूरी होती है कि दुश्मन के हमले के दायरे से बाहर रहते हुए भी उसके बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक केंद्रों, रडार स्टेशनों, कमांड सेंटरों और अलग-अलग सैन्य टुकड़ियों पर हमला किया जा सके। तारा भारतीय वायु सेना को स्वदेशी, कम लागत वाला ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ विकल्प देकर इन जरूरतों को पूरा करता है। इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है।‘

तारा पहले ही विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश कर चुका है, जिससे इसके जल्द ही परिचालन में शामिल होने की उम्मीद है। अब विकास-सह-उत्पादन भागीदारों और अन्य उद्योगों के सहयोग से उत्पादन गतिविधियों पर काम चल रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी कामत ने इस सफल परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, भारतीय वायु सेना और औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पहली उड़ान-परीक्षण को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में महत्त्वपूर्ण प्रगति बताया।

Also Read: भारत पर बड़ा दांव खेल रही Walmart, 40 अरब डॉलर का सामान खरीदा

तारा क्या है और यह कैसे काम करता है?

तारा को एयर-लॉन्च, लंबी दूरी के हवा से जमीन पर मार करने वाले सटीक हथियार के तौर पर डिजाइन किया गया है, ताकि बिना गाइड वाले पारंपरिक हथियारों को कुशल ग्लाइड वाले हथियार में बदला जा सके। यह 650 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकता सकता है। इसके पीछे लगे पंख इस सिस्टम को आखिरी चरण में जटिल युद्धाभ्यास में मदद करते हैं।

सूत्रों ने बताया कि यह हथियार कई कॉन्फिफगरेशन में उपलब्ध होगा, जिसमें तारा-250 लगभग 308 किलोग्राम के वजन के साथ जबकि तारा-450/500 का वजन लगभग 546 किलोग्राम होगा। मॉड्यूलर ग्लाइड और गाइडेंस किट का वजन लगभग 98 किलोग्राम है, जिससे प्रमुख संरचनात्मक संशोधनों के बिना मौजूदा बम इन्वेंटरी के साथ एकीकरण सक्षम हो जाता है। 

Advertisement
First Published - May 8, 2026 | 10:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement