अमेरिका ने रूस और ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए प्रतिबंध में दी गई एक महीने की छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने यह जानकारी दी। इस छूट के खत्म होने से भारत के लिए मुश्किल बढ़ सकती है क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पैदा हुई आपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए भारत ने पिछले 30 दिन में रूस से कच्चे तेल की खरीद में काफी बढ़ोतरी की थी।
बेसंट ने संवाददाताओं को बताया, ‘हम रूसी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेंगे और न ही हम ईरानी तेल के लिए ऐसा कोई कदम उठाएंगे। यह वह तेल था जो 11 मार्च से पहले समुद्र में था। अब वह सारा तेल इस्तेमाल हो चुका है।’
कई अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय रिफाइनरियां उन आपूर्तिकर्ताओं और जहाजों से रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखने की योजना बना रही हैं जिन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस तरह वे उसी खरीद रणनीति को बनाए रखेंगी जिसका पालन वे अमेरिका द्वारा अस्थायी प्रतिबंध छूट दिए जाने से पहले करती थीं।
अमेरिका ने जब 30 दिन तक प्रतिबंध में छूट दी थी तो भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी थी। अमेरिका के फैसले से विभिन्न देशों को रूस से वह तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति मिल गई थी जो समुद्र में फंसे थे। यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।
इक्रा में कॉरपोरेट रेटिंग के उपाध्यक्ष और ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति में आई कमी के बावजूद देश की रिफाइनरियों ने अपना कामकाज सुचारु रूप से जारी रखा है।’ उन्होंने कहा, ‘रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी छूट खत्म होने से भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति थोड़ी तंग हो सकती है। मगर रूस से उन संगठनों के जरिये खरीद जारी रहेगी जिन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा है।’
ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए भी इसी तरह की छूट की घोषणा की गई थी जिसकी समय सीमा 19 अप्रैल को खत्म हो रही है। यह छूट उन पोतों पर लागू है जिन पर 20 मार्च तक ये उत्पाद लाद दिए गए थे। अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने से बचने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने 2019 से ईरान से ऊर्जा उत्पादों की खरीद रोक दी थी। समुद्री इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार ईरान पर प्रतिबंध से पहले भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में ईरानी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 11.5 फीसदी थी।
केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़कर 9 महीने के उच्चतम स्तर 20.6 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया था, जो फरवरी में 10.6 लाख बैरल प्रतिदिन था। अप्रैल में अब तक भारतीय रिफाइनरियों ने 16.7 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल और 2.58 लाख बैरल प्रतिदिन ईरानी कच्चे तेल का आयात किया है।
इस महीने की शुरुआत में रूस के पहले उप प्रधानमंत्री देनिस मांतुरोव की भारत यात्रा के दौरान रूस ने भारत को कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सतत आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। भारतीय रिफाइनरियों को पश्चिम एशिया संकट से पहले रूस 8 से 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल दे रहा था, लेकिन अब उन्हें रूसी तेल के लिए कम से कम 6 से 7 डॉलर प्रति बैरल अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।