प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद बुधवार को दोनों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया और 2030 तक 25 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार का लक्ष्य तय किया और व्यापार, रक्षा एवं दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया।
दोनों पक्षों की बैठक में ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में वियतनाम की दिलचस्पी पर चर्चा हुई। यह सौदा 62.9 करोड़ डॉलर का हो सकता है, जिसमें प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक मदद भी शामिल होगी। दोनों पक्षों ने 18 समझौतों की घोषणा की, जिसमें उनके औषधि प्राधिकरणों के बीच करार भी शामिल है। इससे वियतनाम में भारतीय दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और डिजिटल भुगतान, दुर्लभ खनिज, फार्मा, शिक्षा, बैंकिंग और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में दोतरफा साझेदारी के रास्ते खुलेंगे।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत को अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने के लिए वियतनाम को धन्यवाद दिया। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने द्विपक्षीय संबंधों को एक उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘विजन ओशन’ का एक अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारत से वियतनाम को कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों का निर्यात आसान हो जाएगा।
दोनों पक्षों ने नियमित रक्षा और विदेश मंत्रालय वार्ता स्थापित करने पर भी आपसी सहमति जताई। भारतीय रक्षा निर्माता संघ का प्रतिनिधिमंडल मार्च 2026 में रक्षा खरीद सौदे का जायजा लेने के लिए वियतनाम गया था। चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को सुखोई 30 लड़ाकू विमानों और किलो श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव, मरम्मत एवं संचालन (एमआरओ) में सहायता प्रदान करने की पेशकश की। भारत ने 2023 में वियतनाम को तेज रफ्तार वाली नौकाओं, पनडुब्बी बैटरियों की खरीद और वियतनामी नौसेना के जहाजों के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर ऋण की भी पेशकश की थी।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी कुमारन ने ब्रह्मोस समझौते के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ‘आगे की जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी।’ दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति का प्रदर्शन दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में प्रमुख मुद्दा रहा। मोदी और लाम ने क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की और कानून व्यवस्था, शांति, स्थिरता एवं समृद्धि में योगदान देते रहने पर भी सहमति जताई। इस महीने की शुरुआत में ही राष्ट्रपति निर्वाचित हुए लाम मंगलवार को ही भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर तीन दिन के लिए आए हैं। उनके साथ उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
मोदी ने अपने बयान में कहा, ‘एक दशक पहले वियतनाम आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) में भारत का पहला व्यापक रणनीतिक साझेदार बना। हमारा सहयोग संस्कृति, आपसी संपर्क और क्षमता निर्माण के साथ-साथ सुरक्षा, स्थिरता एवं आपूर्ति श्रृंखला आदि हर क्षेत्र में नए स्तरों तक पहुंचेगा।’
उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले दशक में दोगुना होकर 16 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है और अब इसे 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, ‘हमारे दवा प्राधिकरणों के बीच हुए एमओयू से अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। वियतनाम को भारतीय कृषि, मत्स्य पालन और पशु उत्पादों का निर्यात भी अब और आसान हो जाएगा। बहुत जल्द वियतनाम भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेगा।’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने इस साल के अंत तक भारत-आसियान व्यापार समझौते को उन्नत करने पर भी रजामंदी व्यक्त की। मोदी ने कहा, ‘इससे भारत और सभी आसियान देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी।’
उन्होंने कहा, ‘वित्तीय संपर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। भारत का यूपीआई और वियतनाम की भुगतान प्रणाली को जल्द जोड़ा जाएगा। हम दोनों देशों के बीच राज्यों तथा शहरों के सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।’