भारत की तेल शोधन कंपनियां रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेंगी, भले ही 16 मई को रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने पर अमेरिका द्वारा भारत को दी गई छूट समाप्त हो गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
देश में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत से ही अमेरिकी छूट के आधार पर रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि रूसी तेल के लिए अमेरिकी छूट का नवीनीकरण नहीं होने से भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अमेरिका ने विभिन्न देशों को 17 अप्रैल या उससे पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद जारी रखने की अनुमति दी थी, जो 16 मई तक मान्य थी। शर्मा ने कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगी कि हम छूट से पहले और उसके दौरान रूस से (कच्चे तेल) खरीद रहे थे। हम अभी भी खरीद रहे हैं। ओएमसी के लिए रूसी तेल खरीदने का वाणिज्यिक औचित्य होना चाहिए। कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त कच्चा तेल आवंटित किया गया है।
छूट हो या न हो, इससे हमारी आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इसके लिए सभी प्रयास किए गए हैं।’ पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में रूसी कच्चे तेल की बड़ी भूमिका रही है। हालांकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर असर डाला है।
तेल विपणन कंपनियों ने 16 मई को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की, जो चार वर्षों में पहली वृद्धि थी। इसका मकसद नुकसान की आंशिक भरपाई करना है। शर्मा ने कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बाद राज्य के स्वामित्व वाले खुदरा ईंधन विक्रेताओं को पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडर की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके पहले रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा था।
शर्मा ने कहा, ‘अभी अंडर रिकवरी है। लेकिन पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस मिलाकर अब यह रोजाना 750 करोड़ रुपये के आसपास है।’ अधिकारी ने कहा कि सरकार ने ओएमसी को हो रहे मौजूदा घाटे की भरपाई के लिए आर्थिक सहयोग की कोई योजना नहीं बनाई है।
सरकार ने 15 मई को डीजल पर निर्यात शुल्क को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर लगभग 16.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर शुल्क 33 रुपये प्रति लीटर से घटाकर लगभग 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क लगभग 3 रुपये प्रति लीटर लगाया गया था।
भारत के जहाजरानी मंत्रालय ने कहा कि भारत आए एक एलपीजी कैरियर एसवाईएमआई से माल उतारने का काम पूरा कर लिया है, जिसने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार किया था। मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगाए जहाज 19,965 टन एलपीजी लेकर आया है और 16 मई को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा।