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भारत में बदल रही लोगों की खर्च करने की आदत, खाना छोड़ अब मोबाइल, यात्रा और मनोरंजन पर बढ़ रहा खर्च

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अनाज से ओटीटी तक पहुंचा भारतीयों का खर्च, कोटक रिपोर्ट में दिखा बदलता भारत

Last Updated- May 28, 2026 | 12:37 PM IST
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भारत में लोगों के खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब परिवार पहले की तरह सिर्फ खाने-पीने और जरूरी सामान पर खर्च नहीं कर रहे, बल्कि मोबाइल, ऑनलाइन मनोरंजन, यात्रा, बाहर खाना खाने, प्रीमियम फोन और डिजिटल सेवाओं पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं।

कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट ‘द ग्रेट कंजम्प्शन शिफ्ट’ के मुताबिक, भारत की खपत कहानी अब पूरी तरह बदल चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि भारतीय परिवारों के बजट में अब अनाज और जरूरी खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी घट रही है, जबकि डेटा, मोबाइल, यात्रा, किराया, शिक्षा और मनोरंजन जैसी चीजों पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है।

खाने से हटकर मोबाइल और अनुभवों पर खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में कुल खर्च में खाने की हिस्सेदारी 1999-2000 के 59% से घटकर 2022-23 में 46% रह गई। वहीं शहरी भारत में यह हिस्सा 48% से घटकर 39% पर आ गया। सबसे ज्यादा गिरावट अनाज पर खर्च में देखी गई। इसके उलट मोबाइल, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, वाहन, किराया और शिक्षा पर खर्च बढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वे जरूरी चीजों से ज्यादा सुविधाओं और अनुभवों पर खर्च करना शुरू करते हैं।

अब भारतीयों के खर्च में मोबाइल फोन, ऑनलाइन मनोरंजन प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट डिलीवरी सेवाएं और डिजिटल सदस्यता बड़ी भूमिका निभा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में ओटीटी सदस्यता, ऑनलाइन खरीदारी, प्रीमियम मोबाइल और सुनने वाले डिजिटल उपकरणों के बाजार में तेज वृद्धि हुई है।

भारत में बढ़ रहा ‘अनुभवों’ पर खर्च

रिपोर्ट बताती है कि अब लोग सिर्फ सामान नहीं, बल्कि ‘अनुभवों’ पर भी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। कॉन्सर्ट, लाइव शो, यात्रा और बाहर घूमने-फिरने पर खर्च तेजी से बढ़ा है। भारत में टिकट वाले लाइव कार्यक्रमों की संख्या 2022 के 19,000 से बढ़कर 2025 में 34,000 तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों के लिए 1.3 करोड़ लोगों ने टिकट पाने की कोशिश की, जबकि टिकट सिर्फ 1.5 लाख लोगों को मिल सके। विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में फरवरी तक भारतीयों ने विदेश यात्रा पर करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।

प्रीमियम मोबाइल और एप्पल का बढ़ता असर

रिपोर्ट में एक दिलचस्प तुलना एप्पल और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बीच की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल इंडिया का कारोबार पिछले पांच साल में 6.2 गुना बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का अनुमानित राजस्व हिंदुस्तान यूनिलीवर से लगभग दोगुना हो सकता है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल मोबाइल बिक्री लगभग स्थिर है, लेकिन महंगे यानी प्रीमियम फोन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। 2020 में कुल मोबाइल बिक्री में प्रीमियम फोन का हिस्सा 20% था, जो 2025 तक बढ़कर 26% हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि देश का एक वर्ग अब ज्यादा महंगे और प्रीमियम उत्पाद खरीदने लगा है।

लेकिन क्या सबकी कमाई बराबर बढ़ रही है?

रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि भारत में आय बढ़ जरूर रही है, लेकिन समान रूप से नहीं। कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी अमीर वर्ग की आय 18% की दर से बढ़ रही है, जबकि शहरी मध्यम और आम वर्ग की आय वृद्धि करीब 6% के आसपास है। ग्रामीण अमीरों की आय भी ग्रामीण मजदूरों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट इसे ‘एक देश, दो अलग आर्थिक यात्राएं’ बताती है। यानी देश में खपत बढ़ रही है, लेकिन उसका फायदा हर वर्ग को समान रूप से नहीं मिल रहा।

किराया, मोबाइल बिल और ईएमआई का बढ़ता दबाव

रिपोर्ट बताती है कि शहरों में किराया अब लोगों के बजट का बड़ा हिस्सा बन चुका है। शहरी परिवारों के कुल खर्च में किराए की हिस्सेदारी 1999-2000 के 4.5% से बढ़कर 2022-23 में 6.6% हो गई। मोबाइल डेटा पर खर्च भी तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले आठ वर्षों में मोबाइल डेटा खर्च की वृद्धि ग्रामीण मजदूरी की तुलना में लगभग तीन गुना तेज रही। इसके अलावा परिवारों पर कर्ज और ईएमआई का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट कहती है कि पिछले सात वर्षों में पांच साल ऐसे रहे जब ईएमआई का बोझ आय वृद्धि से ज्यादा तेजी से बढ़ा। इसी का असर घरेलू बचत पर भी दिख रहा है। घरेलू वित्तीय बचत जीडीपी के अनुपात में लगातार दबाव में बनी हुई है।

शेयर बाजार और डिजिटल धोखाधड़ी में बढ़ा नुकसान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संख्या में लोग डेरिवेटिव ट्रेडिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी में पैसा गंवा रहे हैं। सेबी के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2025 में 91% खुदरा निवेशकों को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ। सिर्फ FY25 में खुदरा निवेशकों का कुल नुकसान 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि FY22 से FY25 के बीच कुल नुकसान 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में साइबर फ्रॉड से लोगों को 22,849 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

रिपोर्ट क्या संकेत देती है?

कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि भारत की खपत कहानी अब पूरी तरह बदल चुकी है। लोग अब खाने से ज्यादा डेटा, मोबाइल, यात्रा, मनोरंजन और अनुभवों पर खर्च कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही किराया, ईएमआई और डिजिटल खर्च का दबाव भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश में आय और खपत का बड़ा हिस्सा अब ऊंची आय वाले वर्ग के पास केंद्रित होता जा रहा है। यानी भारत में खर्च बढ़ रहा है, लेकिन यह वृद्धि हर वर्ग तक बराबरी से नहीं पहुंच रही।

(डिस्क्लोजर: बिजनेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में कोटक फैमिली के नियंत्रण वाली इकाइयों की बहुलांश हिस्सेदारी है)

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First Published - May 28, 2026 | 12:16 PM IST

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