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2030 तक 22 अरब डॉलर का होगा भारत का डेटा सेंटर बाजार, AI और क्लाउड से तेज बढ़त

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भारत डेटा सेंटर मार्केट के रूप में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत डेटा सेंटर निर्माण की लागत है कम

Last Updated- April 13, 2026 | 3:31 PM IST
Data Centres

वैश्विक डेटा सेंटर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्तमान में दुनिया भर में 40–50 गीगावाट स्थापित क्षमता है, जो 2030 तक 100 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्यतः क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के तेज विस्तार से प्रेरित है। इस परिवर्तन के बीच भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का विस्तार और हाइपरस्केल ऑपरेटरों के बढ़ते निवेश इसे डेटा अवसंरचना विकास के लिए प्रमुख गंतव्य बना रहे हैं।

वेस्टियन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर बाजार, जिसका मूल्य 2025 में लगभग 10 अरब डॉलर था, 2030 तक दोगुना से अधिक होकर 22 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह इस क्षेत्र में मजबूत विकास की दिशा और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। इस तेज वृद्धि के पीछे इंटरनेट और दूरसंचार ग्राहकों की बढ़ती संख्या, उद्यमों द्वारा क्लाउड को अपनाने की रफ्तार, एआई और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग कार्यभार में विस्तार, तथा डिजिटल भुगतान और ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि प्रमुख कारण हैं।

Parameter Value
Market Size (2025) USD 10 Bn
Projected Market Size (2030) USD 22 Bn
Operational Capacity 1.4 – 1.6 GW
Number of Data Centres 164
Capacity Under Construction 700+ MW
Planned Capacity 1-1.2 GW
Projected Capacity (2030) 4-5 GW

Source: Vestian Research

5 जी के विस्तार से बढ़ी डेटा खपत

5जी अवसंरचना के विस्तार से प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक वायरलेस डेटा खपत 25 जीबी से अधिक हो गई है, जो डेटा उपयोग में तीव्र वृद्धि को दर्शाता है और स्केलेबल डेटा सेंटर अवसंरचना की आवश्यकता को और मजबूत करता है। वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा,
‘मजबूत नीतिगत समर्थन और बढ़ती डिजिटल मांग के बल पर भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से रूपांतरित हो रहा है। वैश्विक स्थापित क्षमता में हिस्सेदारी अभी सीमित होने के बावजूद, एआई अवसंरचना के क्षेत्र में अग्रणी बनने की भारत में अपार संभावनाएं हैं। सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, 20 वर्ष तक कर छूट, जीएसटी लाभ और 2047 तक विस्तारित प्रोत्साहनों के कारण भारत वैश्विक डेटा सेंटर और एआई हब के रूप में उभरने की रणनीतिक स्थिति में है।’

भारत का डेटा सेंटर उद्योग वैश्विक और घरेलू निवेशकों से उल्लेखनीय निवेश आकर्षित कर रहा है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 13–15 अरब डॉलर का निवेश आया, जिसमें कुल पूंजी प्रवाह का लगभग 80% हिस्सा विदेशी संस्थागत निवेशकों का रहा। आगे भी निवेश की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। अगले पांच वर्षों में घोषित परियोजनाओं का कुल आकार 60–70 अरब डॉलर तक है, जिसे मुख्य रूप से हाइपरस्केल प्लेटफॉर्म और संयुक्त उपक्रम विकास आगे बढ़ा रहे हैं।

भारत में डेटा सेंटर निर्माण की लागत कम

भारत लागत के मामले में भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है। यहां डेटा सेंटर निर्माण लागत लगभग 60–70 लाख डॉलर प्रति मेगावाट है, जो सिंगापुर और जापान जैसे परिपक्व एशिया-प्रशांत बाजारों की तुलना में काफी कम है। यही कारण है कि बड़े पैमाने के निवेश के लिए भारत की आकर्षकता लगातार बढ़ रही है।

मुंबई है भारत का डेटा सेंटर हब

भारत में डेटा सेंटर अवसंरचना अभी कुछ प्रमुख महानगरों में केंद्रित है। मुंबई देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब बना हुआ है, जिसे मजबूत वैश्विक कनेक्टिविटी और अवसंरचनात्मक लाभ का समर्थन प्राप्त है। वहीं चेन्नई एक महत्वपूर्ण वैश्विक डेटा गेटवे के रूप में उभरा है, जहां कई सबमरीन केबल लैंडिंग पॉइंट उच्च क्षमता और कम विलंबता (लो-लेटेंसी) कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर हैदराबाद, बेंगलूरु और पुणे मजबूत आईटी इकोसिस्टम, पर्याप्त भूमि उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत के कारण उभरते द्वितीयक हब बन रहे हैं।

City

% Share

Mumbai

49%

Chennai

18%

NCR

11%

Pune

8%

Bengaluru

7%

Hyderabad

5%

Kolkata

1%

Others*

1%

नोट: अन्य में अहमदाबाद, कोच्चि, मोहाली, विजयवाड़ा, जयपुर, नासिक, भुवनेश्वर, इंदौर, गांधीनगर और रायपुर शामिल हैं

मुंबई और चेन्नई अभी भी प्राथमिक हब बने हुए हैं, लेकिन डेटा सेंटर ऑपरेटर अब वितरित डिजिटल अवसंरचना के लिए टियर-II शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं। अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे शहर प्रतिस्पर्धी भूमि उपलब्धता, बेहतर होती डिजिटल अवसंरचना, राज्य सरकारों की सहयोगी नीतियों और बढ़ती एंटरप्राइज मांग के कारण तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। टियर-II बाजारों में वर्तमान परिचालन क्षमता 60–80 मेगावाट आंकी गई है, जो 2026 के अंत तक 100 मेगावाट से अधिक होने की उम्मीद है।

2026 तक स्थापित क्षमता 2 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान

डिजिटल परिवर्तन की रफ्तार बढ़ने के साथ अगले दशक में भारत का डेटा सेंटर बाजार सतत विस्तार देखेगा। 2026 के अंत तक स्थापित क्षमता 1.7–2.0 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जिसे लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश का समर्थन मिलेगा। यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 4–5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। एआई के बढ़ते उपयोग, क्लाउड अवसंरचना की मांग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेज विस्तार से भारत के डेटा सेंटर बाजार में वृद्धि की अगली लहर संचालित होगी।

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First Published - April 13, 2026 | 3:31 PM IST

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