पुणे की रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी निबे ने गुरुवार को अपने ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन का पहला तकनीकी परीक्षण पूरा करने का ऐलान किया है। कुछ दिन पहले ही कंपनी ने लंबी दूरी तक मार करने वाली ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। इसे भारत की ‘मेक-इन-इंडिया’पहल के तहत सटीक निशाना साधने वाली हथियार प्रणालियों की दिशा में एक और अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक ये परीक्षण भारतीय सेना द्वारा 100 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले लोइटरिंग मुनिशन सिस्टम के लिए जारी किए गए प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) के आधार पर किए गए थे। परीक्षण राजस्थान के पोकरण फायरिंग रेंज और उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) में विभिन्न परिचालन स्थितियों (जिनमें उच्च ऊंचाई वाले वातावरण भी शामिल हैं) के तहत किए गए। निबे ने कहा कि पोकरण में ‘वायु अस्त्र-1’ ने 10 किलोग्राम विस्फोटक के साथ अपना पहला तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।
खबरों के मुताबिक इस मिसाइल ने 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को एक ही प्रयास में भेद दिया और एक मीटर से भी कम की वृत्ताकार त्रुटि संभाव्यता (सीईपी) हासिल की जो निशाना साधने की इसकी उच्च क्षमता को दर्शाता है। कंपनी ने गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कहा, ‘परीक्षण ने हमला टालने, हमला और दोबारा हमला करने जैसी महत्त्वपूर्ण परिचालन क्षमताओं को भी साबित किया है। ये सारी खूबियां आधुनिक तेज तर्रार हथियार प्रणालियों के लिए आवश्यक मानी जाती हैं।’
एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम में इस रक्षा कंपनी ने इन्फ्रारेड कैमरा-निर्देशित लक्ष्यीकरण प्रणाली का उपयोग कर रात्रि में हमला करने की क्षमता का भी परीक्षण किया। इस मिसाइल ने एक ही प्रयास में दो मीटर की सीईपी के भीतर लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया। परीक्षणों ने लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (जीसीएस) से फॉरवर्ड कंट्रोल स्टेशन को परिचालन नियंत्रण स्थानांतरित करने की क्षमता का भी मुजाहिरा किया।
जोशीमठ के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में ‘वायु अस्त्र-1’ की सहनशक्ति का परीक्षण किया गया जहां इस मिसाइल ने कथित तौर पर 90 मिनट से अधिक समय तक उड़ान भरी। 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर संचालित इस उड़ान अभियान का उद्देश्य भारत की उत्तरी सीमाओं पर आम तौर पर कठिन पहाड़ी इलाकों और खराब मौसम जैसे हालात में इस प्रणाली के प्रभावी संचालन क्षमता का परीक्षण करना था।
कंपनी ने बताया कि मिशन पूरा होने के बाद मिसाइल सुरक्षित वापस लाया गया ताकि इसे आगे की उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जा सके। यह पुन: प्रयोज्य परिचालन क्षमता को दर्शाता है जिससे लागत कम हो सकती है और मिशन की निरंतरता में सुधार हो सकता है। लॉइटरिंग मुनिशन को अक्सर ‘आत्मघाती ड्रोन’ या ‘कामिकेज़ ड्रोन’ कहा जाता है।
ये हथियार लक्ष्य क्षेत्रों के ऊपर मंडराने, खतरों की पहचान करने और उच्च सटीकता के साथ हमला करने की क्षमता के कारण आधुनिक युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये दोनों परीक्षण हाल ही में ओडिशा तट के पास एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में निबे लिमिटेड द्वारा सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली के सफल परीक्षणों के तुरंत बाद हुए। 18 और 19 मई को किए गए परीक्षणों के दौरान स्वदेशी रूप से निर्मित सूर्यास्त्र रॉकेटों के कई चरण (जिनमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर मारक क्षमता वाले संस्करण शामिल थे) का परीक्षण किया गया।