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एरोस्पेस कारोबार पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जबरदस्त होड़, 8,000 एकड़ जमीन की पेशकश से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

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मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कर्नाटक एरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में देश के कुल कारोबार में 65 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। वहीं आंध्र प्रदेश ने एक नीति तैयार की है।

Last Updated- July 16, 2025 | 10:49 PM IST
Karnataka Spacetech Policy

दक्षिण भारत के दो राज्य कर्नाटक और आंध्र प्रदेश एरोस्पेस उद्योग के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आमने-सामने आ गए हैं। दोनों के बीच यह होड़ तब हो रही है जब देश के एरोस्पेस उद्योग का आकार वर्तमान 27.1 अरब डॉलर से बढ़कर 2033 में 54.4 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। दोनों राज्यों के बीच की खींचतान तब सार्वजनिक हो गई जब कर्नाटक ने बेंगलूरु के केंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डे के निकट देवनहल्ली में एरोस्पेस पार्क बनाने के लिए कृषि भूमि अधिग्रहीत करने की योजना छोड़ दी।

स्थानीय किसान पिछले 1,198 दिनों से इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने निवेशकों को आमंत्रित किया कि वे कर्नाटक से आंध्र प्रदेश आएं। उन्होंने 8,000 एकड़ जमीन की पेशकश भी की जो ‘बेंगलूरु के निकट’ है।इसके जवाब में कर्नाटक के दीर्घ और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि आंध्र प्रदेश उनकी मुश्किलों से लाभ लेने की कोशिश कर रहा है और जमीन की कमी के कारण कोई निवेश राज्य से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।

कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को निर्णय लिया था कि देवनहल्ली के 13 गांवों की 1,777 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। इसके कुछ ही घंटे के भीतर लोकेश ने निवेशकों को आंध्र प्रदेश आमंत्रित कर दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘प्रिय एरोस्पेस उद्योग। यह सुनकर दुख हुआ। मेरे पास आपके लिए एक अच्छा आइडिया है। आप लोग आंध्र प्रदेश में निवेश क्यों नहीं करते? हमारे पास आपके लिए आकर्षक एरोस्पेस नीति है, बेहतरीन प्रोत्साहन है और 8,000 एकड़ से अधिक जमीन है जो इस्तेमाल के लिए तैयार है और बेंगलूरु के निकट भी है। आप से जल्दी बातचीत की कामना करता हूं।’

बाद में मीडिया के जरिये उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रदेश निवेशकों को एक रुपये की कीमत पर जमीन देने को तैयार है। उन्होंने कुछ सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों का हवाला भी दिया जिन्हें ऐसी कम कीमत पर जमीन दी गई है।

इसके उत्तर में कर्नाटक के मंत्री पाटिल ने बुधवार को कहा, ‘मैं आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश को सही समय पर जवाब दूंगा। उन्हें लगता है कि वे मुश्किल का लाभ ले सकते हैं। खैर, हमारे यहां सब ठीक है। एक भी उद्योग जमीन की कमी के कारण कर्नाटक से बाहर नहीं जाएगा। मैं किसी उद्योग को नहीं जाने दूंगा।’

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कर्नाटक एरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में देश के कुल कारोबार में 65 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। वहीं आंध्र प्रदेश ने एक नीति तैयार की है और वह अगले पांच साल में इस क्षेत्र में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाना चाहता है।

नीति के तहत पूरे प्रदेश में विशेष विनिर्माण कॉरिडोर तैयार किए गए हैं। इसमें नौसेना के लिए विशाखापट्टनम- श्रीकाकुलम, मिसाइल के लिए जग्गैयापेट-दोनाकोंडा, ड्रोन तकनीक के लिए कुर्नूल-ओर्वाकल और एरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स के लिएलेपाक्षी-मदकासिरा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त तिरुपति को प्रस्तावित डीआरडीओ उत्कृष्टता केंद्र के साथ शोध एवं विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उधर, भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने कहा, ‘कारोबारों को इस तरह लुभाया जाता है। उद्योग का इस तरह स्वागत किया जाता है और रोजगार ऐसे तैयार किए जाते हैं। उम्मीद है कि कर्नाटक सरकार नारा लोकेश से कुछ सीखेगी।’

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First Published - July 16, 2025 | 10:43 PM IST

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