भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने सोमवार को कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों से कोई शुल्क नहीं वसूला है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि यह अहम जल मार्ग ‘ईरान के अधिकार क्षेत्र’ में आता है।
नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में फतहाली ने कहा कि ईरान भारत को मित्र मानता है। उन्होंने कहा, ‘इस क्षेत्र में भारत और ईरान के हित और तकदीर दोनों साझा हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक उनसे कोई शुल्क लिया है?’ यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने ईरान से तेल खरीदा है, राजदूत ने रहस्यमयी जवाब में कहा, ‘हमारे पास तेल है और कोई भी जो हमसे तेल खरीदना चाहता है, खरीद सकता है।’
भारत ने स्पष्ट रूप से उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उसने ईरान को नौ जहाजों के सुरक्षित निकास के लिए शुल्क का भुगतान किया है। ये जहाज पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने के पहले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे थे, तभी ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों के पारगमन पर रोक लगा दी थी। वर्तमान में 15 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।
फतहाली ने अपनी सरकार का यह रुख दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान का जल क्षेत्र है और ईरान निकट भविष्य में वहां से जहाजों के आवागमन का एक तंत्र तैयार करेगा। जबकि भारत का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है।
भारत से शुल्क वसूले जाने के सवालों पर फतहाली ने कहा, ‘भारत सरकार के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं’ और संघर्ष के दौरान ‘अच्छा संपर्क’ बनाए रखा। ईरानी राजदूत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़श्कियन के बीच दो बार फोन पर बातचीत हुई, और विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच पांच बार चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘हमारा भारत के साथ अच्छा संपर्क है। हमारे विदेश मंत्री ने भारत को उन पांच देशों में शामिल किया है जो ईरान के मित्र हैं।‘ उन्होंने आगे कहा कि ईरान और भारत ‘क्षेत्र में साझा हित और साझा भाग्य रखते हैं।’ ईरानी राजदूत ने कहा, ‘हम भारत सरकार की मदद करना चाहते हैं, जैसे उन्होंने इन दिनों हमारी मदद की है।’ उल्लेखनीय है कि सोमवार को भारत से ईरान के लिए मानवीय सहायता की तीसरी खेप रवाना हुई।
रविवार शाम को विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरिटा ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में आयोजित ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की शोक सभा में भाग लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी खामेनेई के निधन के 40वें दिन (चेहलुम) पर आयोजित इस समारोह में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। खामेनेई का 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के हमले में निधन हो गया था।