बुनियादी ढांचे के लिए कर्ज मुहैया कराने वाली सरकारी ऋणदाता इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉर्पोरेशन (आईआरएफसी) ने सोमवार को मेट्रो रेल (हैदराबाद) लिमिटेड (एलऐंडटी एमआरएचएल) के साथ 13,527 करोड़ रुपये का सावधि ऋण समझौता किया है। यह समझौता हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना ऋण देनदारियों के रीफाइनैंसिंग के लिए किया गया है और इसके साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर दिग्गज लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) परियोजना से बाहर हो गई है।
यह रीफाइनैंसिंग व्यवस्था एलऐंडटी और तेलंगाना सरकार के बीच एक समझौते के मुताबिक है, जिसके तहत राज्य ने भारत की सबसे लंबी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मेट्रो परियोजना में एलऐंडटी की हिस्सेदारी 1461 करोड़ रुपये में खरीदी।
तेलंगाना के मुख्य सचिव के रामकृष्ण राव के अनुसार हैदराबाद मेट्रो फेज-1 का पिछले साल राजस्व 1,100 करोड़ रुपये था औरउसे 340 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह मेट्रो लाइन अगले साल मुनाफे में आ सकती है, क्योंकि रीफाइनैंसिंग के बाद कर्ज की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। आईआरएफसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे के मुताबिक रीफाइनैंसिंग समझौते के बाद उधारी की लागत में करीब 40 प्रतिशत की कमी आएगी। हालांकि दुबे ने मौजूदा ब्याज दरों और आईआरएफसी के समझौते के बीच के अंतर की पुष्टि नहीं की, लेकिन अधिकारियों के अनुसार दरें लगभग 300 आधार अंक कम हैं।