facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

केरल बनेगा देश का पहला ‘राज्य बैक्टीरिया’ वाला राज्य, लाभकारी सूक्ष्मजीवों के संरक्षण और जागरूकता की अनोखी पहल

Advertisement

कई लोगों को राज्य 'बैक्टीरिया' सुनकर हैरानी हो सकती है। मगर राज्य के अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास पहले से ही एक राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव लैक्टोबैसिलस बल्गारिकस है

Last Updated- January 20, 2026 | 10:35 PM IST
Bacteria
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आपने राज्य पशु, पक्षी या फूल के बारे में जरूर सुना होगा मगर अब केरल देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जिसका एक खास ‘जीवाणु’ (बैक्टीरिया) होगा। दरअसल राज्य के इस कदम का मकसद लोगों के बीच लाभकारी सूक्ष्मजीवों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनका संरक्षण करना है।

इस बारे में एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि आगामी 23 जनवरी को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन आधिकारिक तौर पर सबसे लाभकारी बैक्टीरिया में एक के नाम की घोषणा करेंगे जो कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे कई क्षेत्रों में मनुष्यों के लिए उपयोगी है। इतना ही नहीं, केरल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन माइक्रोबायोम (सीओईएम) जल्द ही खाद्य उत्पादों और प्रोबायोटिक बैक्टीरिया सहित माइक्रोबायोम आधारित उत्पादों का विकास करेगा।

कई लोगों को राज्य ‘बैक्टीरिया’ सुनकर हैरानी हो सकती है। मगर राज्य के अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास पहले से ही एक राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव लैक्टोबैसिलस बल्गारिकस है जिसका उपयोग दही के उत्पादन के लिए किया जाता है। इसकी औपचारिक घोषणा 2012 में की गई थी।

केरल में शुक्रवार को सीओईएम के उद्घाटन के दौरान औपचारिक घोषणा की जाएगी। सीओईएम के निदेशक सबू थॉमस ने कहा,‘इस कदम का उद्देश्य लाभकारी बैक्टीरिया के बारे में जागरूकता पैदा करना और उनका संरक्षण करना है। हमारे पास राज्य पशुओं और पक्षियों के टैग हैं। हालांकि, सूक्ष्मजीवों की अदृश्य दुनिया प्रकृति में हमारे लिए बहुत कुछ कर रही है न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि पूरे जीवन के लिए।’

उन्होंने कहा कि यह कदम लोगों की यह मानसिकता बदलनी है कि बैक्टीरिया या वायरस केवल बीमारियां ही फैलाते हैं। राज्य ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण के लिए राज्य परिषद के तहत एक विशेषज्ञ समिति के माध्यम से इस बैक्टीरिया का चयन किया है। भारत में यह उद्योग अपने आप में छोटा नहीं है।

होराइजन ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार भारत में समग्र माइक्रोबियल फर्मेंटेशन टेक्नॉलजी बाजार लगभग 4.47 अरब डॉलर का था और 2030 तक 8 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। यह एंटीबायोटिक, वैक्सीन, एंजाइम, बायोलॉजिक्स और सक्रिय दवा तत्व (एपीआई) के उत्पादन के लिए जीवाणु किण्वन (बैक्टीरियल फर्मेंटेशन) के उपयोग के अलावा है। बैक्टीरिया का उपयोग औद्योगिक रूप से जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशक के लिए भी किया जाता है ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण के अनुकूल फसल सुरक्षा को बढ़ाया जा सके।

एक अन्य तेजी से बढ़ता इस्तेमाल प्रोबायोटिक का निर्माण है जिसका उपयोग बेहतर आंत स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादों के लिए किया जाता है। यह उद्योग मुख्य रूप से लैक्टोबैसिलस, बिफिदोबैक्टीरियम और बैसिलस स्ट्रेन पर निर्भर करता है।

माइक्रोबायोम आधारित चिकित्सा भी तेजी से विकसित हो रही है जो किसी व्यक्ति के आंत में मौजूद बैक्टीरिया का विश्लेषण करती है। इसके जरिये हानिकारक रोगाणुओं को कम कस लाभकारी रोगाणुओं को बढ़ावा दिया जाता है। थॉमस ने कहा,‘मुख्य उद्देश्य न केवल एक बैक्टीरिया का संरक्षण करना है बल्कि कई का संरक्षण करना है।

राज्य बैक्टीरिया का टैग केवल एक प्रतिनिधित्व होगा।’सीओईएण मनुष्यों, जानवरों, पर्यावरण और जलीय जीवन से संबंधित माइक्रोबायोम का व्यापक अध्ययन करेगा।

उन्होंने कहा,‘सीओईएम उद्योग के लिए माइक्रोबायोम आधारित उत्पादों को विकसित करने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करना चाहता है। लिहाजा यह केवल एक शोध केंद्र नहीं होगा बल्कि इस तरह के उत्पादों की तकनीकी विशेषज्ञता उद्योग को हस्तांतरित करेगा।’

केंद्र का प्रमुख ध्यान अंतःविषय अनुसंधान और उद्यमिता, क्षेत्रों में परस्पर सहयोग और नवीन उत्पाद विकास का समन्वय करना है। यह माइक्रोबायोम डेटाबेस बनाने और स्टार्टअप तैयार करने के लिए बड़ी डेटा तकनीक और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके माइक्रोबायोम डेटा की मैपिंग भी करेगा।

सीओईएम को केरल सरकार द्वारा केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के तत्वावधान में केरल विकास और नवाचार रणनीतिक परिषद की साझेदारी और राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक मार्गदर्शन के साथ शुरू किया गया था। केंद्र का आदर्श वाक्य ‘जीवन के लिए जीवाणु’ है। केंद्र वर्तमान में किन्फ्रा फिल्म ऐंड वीडियो पार्क, कझाकूट्टम, तिरुवनंतपुरम में स्थित है और इसे स्थायी रूप से बायो 360 लाइफ साइंस पार्क तोन्नक्कल, तिरुवनंतपुरम में स्थानांतरित किया जाएगा।

Advertisement
First Published - January 20, 2026 | 10:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement