लोक सभा ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव को बुधवार को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए संकल्प पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इसे मतदान के लिए सदन के समक्ष रखा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ध्वनिमत से संकल्प को अस्वीकृत कर दिया। संकल्प पर चर्चा और मतदान के दौरान बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और अफसोसजनक बात है। उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है। गृह मंत्री के एक शब्द को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और उनसे माफी की मांग की।
गृह मंत्री शाह ने सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण और सदन की कार्यवाही में उनकी भागीदारी पर तीखी टिप्पणियां करते हुए विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उन्हें निचले सदन में बोलने नहीं दिया जाता। बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने यह भी कहा, ‘आप प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव लाइए। हम मुद्दों पर जवाब देंगे, लेकिन लोक सभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव को मैं सामान्य बात नहीं मानता।’
उन्होंने कहा, ‘विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह आरोप सही नहीं है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। नेता प्रतिपक्ष की पार्टी लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाई, उस पर भी वह नहीं बोले। वह बोलना ही नहीं चाहते। बोलना चाहते हैं तो नियमानुसार बोलना नहीं आता। यह कोई सभा नहीं है, यहां नियमानुसार बोलना होता है।’
ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर निचले सदन में चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्षी सदस्य जब भी लोक सभा में जरूरी मुद्दे उठाना चाहते हैं, तो अध्यक्ष ओम बिरला के पास केवल ‘नो’ शब्द होता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्य विजय कुमार हंसदा ने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के नाम का उल्लेख करने के बाद इस सदन में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला शब्द ‘नो’ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अध्यक्ष ओम बिरला के हाथ ‘बांध’ दिए हैं, जिससे उन्हें सत्तारूढ़ दल की इच्छा के अनुसार काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।