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महंगाई की मार! रसोई गैस ₹29 और महंगी, दिल्ली में अब 942 रुपये का हुआ घरेलू LPG सिलेंडर

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इससे पहले, मार्च महीने की शुरुआत में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम बढ़ने के कारण रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया गया था

Last Updated- June 07, 2026 | 8:37 AM IST
LPG Cylinder
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो: PTI

LPG Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर अब भारतीय रसोई पर पड़ने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में फिर 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले तीन महीनों के भीतर आम जनता को लगा यह दूसरा बड़ा झटका है। नई दरें लागू होने के बाद अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है।

इससे पहले, मार्च महीने की शुरुआत में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम बढ़ने के कारण रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया गया था।

क्यों बढ़ रहे हैं रसोई गैस के दाम?

सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को मुख्य वजह बताया है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी से अधिक LPG दूसरे देशों से आयात करता है। भारत में गैस की कीमतें सीधे तौर पर ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ से तय होती हैं, जिसे सऊदी अरामको कंपनी हर महीने तय करती है।

पश्चिम एशिया के संकट और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में आई रुकावटों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की सप्लाई काफी कम हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस करीब 522 डॉलर प्रति टन था, जो अप्रैल आते-आते लगभग 50 फीसदी उछलकर 775 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। इस वजह से भारत में एक घरेलू LPG सिलेंडर की लागत (सप्लाई कॉस्ट) बढ़कर करीब 1,600 रुपये हो चुकी है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को कितनी राहत?

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी के बावजूद आम भारतीय उपभोक्ताओं को इसके पूरे बोझ से बचाया जा रहा है। जहां दिल्ली में सामान्य ग्राहकों को अब सिलेंडर के लिए 942 रुपये देने होंगे, वहीं ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के लाभार्थियों को सरकार की तरफ से बड़ी राहत मिल रही है।

उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले 10.35 करोड़ से अधिक परिवारों को सरकार की तरफ से 300 रुपये प्रति सिलेंडर की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) यानी सब्सिडी मिलती रहेगी। इस सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की प्रभावी कीमत 642 रुपये ही रहेगी। सरकार के मुताबिक, यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिलेंडर की असल लागत से करीब 60 फीसदी कम है।

Also Read: कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम 42 रुपये बढ़े, होटल-रेस्तरां पर बढ़ा लागत का दबाव

घाटे में तेल कंपनियां, सरकार देगी मुआवजा

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 29 रुपये की यह बढ़ोतरी बहुत मामूली है और सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अब भी हर सिलेंडर पर भारी घाटा उठा रही हैं। नए रेट लागू होने के बाद भी तेल कंपनियों को प्रति घरेलू सिलेंडर 600 से 700 रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी से पहले यह घाटा लगभग 703 रुपये प्रति सिलेंडर था।

मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू LPG पर कंपनियों का यह घाटा (अंडर-रिकवरी) बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 41,338 करोड़ रुपये था। इस भारी-भरकम बोझ को कम करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने तेल कंपनियों के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।

विपक्ष हमलावर, सरकार पर लगाया ‘जबरन वसूली’ का आरोप

रसोई गैस के दाम बढ़ते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। पार्टी ने लिखा कि ‘इन्फ्लेशन मैन’ (महंगाई पुरुष) मोदी ने एक बार फिर जनता पर चाबुक चलाया है और घरेलू गैस सिलेंडर को 29 रुपये और महंगा कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का फॉर्मूला साफ है- जनता से वसूली करो और अमीर दोस्तों की तिजोरियां भरो।

पेट्रोल, डीजल और CNG भी दे रहे हैं दर्द

महंगाई का यह करंट सिर्फ रसोई गैस तक सीमित नहीं है। मई के मध्य से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, वाहनों और घरों में इस्तेमाल होने वाली CNG के दाम भी करीब 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्र सरकार का दावा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में वह पूरी कोशिश कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर देश की जनता पर न पड़े।

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First Published - June 7, 2026 | 8:29 AM IST

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