facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वित्तीय दबाव के चलते मध्य प्रदेश ने अनाज की विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलने की इच्छा जताई

Advertisement

राज्य सरकार विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) के तहत धान या चावल और गेहूं को सीधे खरीदकर भंडारण करती है

Last Updated- November 03, 2025 | 10:42 PM IST
CM Mohan Yadav

मध्य प्रदेश ने वित्तीय चुनौतियों के कारण विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलने के लिए केंद्र से संपर्क साधा है। मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा अनाज खरीदने वाले राज्यों में से एक है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कुछ हफ्ते पहले केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा कि अनाज खरीद की विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) में बकाया मिलने में देरी के कारण राज्य सरकार को काफी ज्यादा वित्तीय घाटा सहना पड़ रहा है। इस दौरान किसानों को भुगतान करने के लिए बैंकों से लिया गया ऋण बढ़कर 72,177 करोड़ रुपये हो गया है और इसे अब चुकाने का समय आ गया है। इन सभी कारकों के कारण यह राज्य विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलकर भारतीय खाद्य निगम (एससीआई) की सीधी खरीद के पुराने तरीके को अपनाना चाहता है।

राज्य सरकार विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) के तहत धान या चावल और गेहूं को सीधे खरीदकर भंडारण करती है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत अनाज का वितरण करती है। यदि राज्य सरकार का गेहूं या चावल खरीद का भंडार इसके आवंटित टीडीपीएस और अन्य कल्याण योजनाओं से अधिक हो जाता है तो ऐसे में राज्य सरकार अतिरिक्त भंडार भारतीय खाद्य निगम को दे देती है।

राज्य के लिए विकेंद्रीकृत खरीद की आर्थिक लागत विभिन्न स्तरों पर खरीद और वितरण में हुए खर्च का कुल योग है। हालांकि केंद्रीकृत खरीद प्रणाली के तहत केंद्रीय पूल के लिए खाद्यान्नों की खरीद एफसीआई या राज्य सरकार की एजेंसियां करती हैं और फिर भंडारण के लिए स्टॉक को एफसीआई को सौंप देती हैं। इसके बाद भारत सरकार संबंधित राज्य को तय आवंटन करती है या अधिशेष स्टॉक को अन्य राज्यों में ले जाती हैं।

दरअसल डीसीपी योजना को अपनाने का कारण यह था कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सके। इसमें खरीद प्रक्रिया की दक्षता बढ़ जाती है और राज्यों को गैर पारंपरिक तरीके से खरीद के लिए प्रोत्साहित करता है।

Advertisement
First Published - November 3, 2025 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement