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लाडकी बहिन योजना से 80 लाख महिलाएं हुई बाहर, विपक्ष बोला- KYC सिर्फ बहाना, ‘वित्तीय संकट’ से जुझ रही सरकार 

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इसे लेकर विपक्षी दलों ने तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार गंभीर वित्तीय संकट के कारण लाभार्थियों को योजना से बाहर कर रही है

Last Updated- June 01, 2026 | 5:36 PM IST
Ladki Bahin Yojana
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र सरकार की लाडकी बहिन योजना में 80 लाख महिलाओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के लिए ऑनलाइन माध्यम से KYC (उपभोक्ता को जानो) की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद 80 लाख महिलाएं इस योजना से बाहर हो गई हैं। इसे लेकर विपक्षी दलों ने तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार गंभीर वित्तीय संकट के कारण लाभार्थियों को योजना से बाहर कर रही है।

E-KYC के बाद हुई बड़ी छंटनी 

30 अप्रैल की ‘E-KYC’ समयसीमा के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर करीब 1.7 करोड़ रह गई है, लेकिन यह कटौती केवल ‘E-KYC’ न कराने के कारण नहीं, बल्कि पात्रता मानदंडों का पालन न करने से भी जुड़ी है। सरकार ने लाभार्थियों को E-KYC पूरी करने के लिए आठ महीने का समय दिया था। करीब 50 से 55 लाख महिलाओं ने यह प्रक्रिया पूरी ही नहीं की, जबकि दो से तीन लाख ने इस दौरान अपनी त्रुटियां सुधारीं।

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पात्रता जांच में लाखों नाम बाहर 

इसके अलावा, करीब 12 लाख महिलाएं आयकर दाता पाई गईं, जो 2.5 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा से ज्यादा हैं और 4.5 लाख से ज्यादा महिलाएं 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुकी थीं। करीब पांच लाख महिलाएं पहले से नमो शेतकरी योजना का लाभ उठा रही हैं।

ई-केवाईसी पूरी करने के बावजूद मासिक किस्त न मिलने की शिकायतों पर अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक लाभार्थियों की अंतिम संख्या एक सप्ताह में स्पष्ट हो जाएगी और शिकायतों का पुन: सत्यापन किया जा रहा है। 80 लाख महिलाओं को केवल E-KYC न कराने के आधार पर योजना से हटाया गया है।

सुप्रिया सुले ने सरकार पर साधा निशाना 

राकांपा (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि चुनावी अवधि के दौरान लाभार्थियों का उचित सत्यापन किए बिना जल्दबाजी में इस योजना को लागू किया गया था। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा कि यह हैरानी की बात है कि सरकार को करीब डेढ़ साल बाद यह एहसास हुआ कि 80 लाख महिलाएं कथित रूप से इस योजना के लिए पात्र नहीं थीं। इससे पता चलता है कि राजनीतिक, प्रशासनिक और क्रियान्वयन, तीनों स्तरों पर सरकार की गंभीर सामूहिक विफलता रही है। यह योजना करदाताओं के रुपये से क्रियान्वित की जा रही है। ऐसे में एक अहम सवाल उठता है कि क्या सरकार पिछले डेढ़ साल से अपात्र लाभार्थियों को जनता का धन बांट रही थी।

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जयंत पाटिल ने वित्तीय संकट का दावा किया 

विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने दावा किया कि योजना से लाभार्थियों को हटाना राज्य के गंभीर वित्तीय संकट को दर्शाता है। पाटिल ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद और विधानसभा चुनावों से पहले इस योजना को लागू किया गया था जिसके तहत महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती है। पाटिल ने कहा कि अब 80 लाख महिला लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। यह उन्हीं लोगों को धोखा देना है, जिन्हें सहायता का वादा किया गया था। केंद्र के बाद अब राज्य भी गंभीर वित्तीय संकट में है। पहली मार हमारी लाडकी बहिनों पर पड़ी है। राज्य का राजकोषीय घाटा काफी अधिक है और वैश्विक आर्थिक मंदी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

योजना बंद करने की हो रही तैयारी

शिवसेना (उबाठा) के नेता आदित्य ठाकरे ने दावा किया कि सरकार ने शुरुआत में महिलाओं को मिलने वाली मासिक सहायता राशि बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन अब उल्टे 80 लाख से अधिक लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया है। विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लाडकी बहिन योजना को धीरे-धीरे बंद करने के इरादे से लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है। पवार ने एक बयान में दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले योजना में 2.47 करोड़ लाभार्थी थीं, जबकि अब करीब 81 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। केवाईसी तो बस एक बहाना है। असली मकसद लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में हटाकर योजना को बंद करना है।

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क्या है लाडकी बहिन योजना?

महाराष्ट्र में महायुति सरकार की ओर से शुरू की गई मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना एक बहुत ही महत्वाकांक्षी पहल है। इस योजना की घोषणा 2024 के विधानसभा चुनावों से छह महीने पहले की गई थी। यह योजना बेहद लोकप्रिय साबित हुई और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस पहल के तहत जिन परिवारों की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है, उन परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है।

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First Published - June 1, 2026 | 5:31 PM IST

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