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बंद नहीं होगी लाडकी बहिन योजना, वापस नहीं ली जाएगी अपात्र महिलाओं को दी गई राशि

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वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान योजना से जुड़े करीब 80 लाख लाभार्थियों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार की तीखी आलोचना की

Last Updated- June 02, 2026 | 6:32 PM IST
Ladki Bahin Yojana

राज्य सरकार अपनी प्रमुख मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को बंद नहीं करेगी और हाल में लाखों लाभार्थियों को लिस्ट से हटाए जाने के बावजूद 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलता रहेगा। हालांकि अपात्र महिलाओं को दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी। वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान योजना से जुड़े करीब 80 लाख लाभार्थियों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार की तीखी आलोचना की।

वेरिफिकेशन में सामने आईं गड़बड़ियां

योजना शुरू होने के बाद सरकार ने लाभार्थियों का वेरिफिकेशन कराया था, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। जब योजना शुरू की गई थी, तब महिलाओं को स्वयं अपने पात्र होने का प्रमाण देने की अनुमति दी गई थी, क्योंकि कई महिलाओं के पास दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। बाद में वेरिफिकेशन कराया गया, क्योंकि इस योजना पर होने वाला सरकारी खर्च ऑडिट के दायरे में आता है।

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जांच में 10 लाख अपात्र लाभार्थी मिले

जांच में कई विसंगतियां सामने आईं जिनमें सरकारी कर्मचारियों के परिवारों की महिलाओं द्वारा लाभ लेना और कुछ मामलों में पुरुषों द्वारा आवेदन करना भी शामिल हैं। लगभग 10 लाख लाभार्थियों के मामलों में पात्रता संबंधी गड़बड़ियां पाई गईं, जबकि करीब 14 हजार पुरुषों ने भी इस योजना के तहत आवेदन किया था। पात्रता की पुष्टि के लिए सरकार ने आयकर, परिवहन और राशन कार्ड संबंधी डाटाबेस से लाभार्थियों का मिलान किया। अपात्र महिलाओं और अनिवार्य E-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं करने वालों को भुगतान रोक दिया गया है।

अपात्र महिलाओं से वापस नहीं ली जाएगी राशि

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को आश्वस्त किया कि अपात्र पाई गई महिलाओं से पूर्व में दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी। हालांकि, जिन पुरुषों ने गलत तरीके से योजना का लाभ लिया है, उन्हें यह राशि लौटानी होगी। लगभग 1.70 करोड़ महिलाएं सभी पात्रता शर्तें पूरी करती हैं और उन्हें योजना के तहत सहायता मिलती रहेगी। यह योजना कभी बंद नहीं होगी। आज भी यह देश के राज्यों में अपनी तरह की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है और आगे भी जारी रहेगी।

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विपक्ष ने जवाबदेही तय करने की मांग की

महाराष्ट्र सरकार की इस प्रमुख योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने जवाबदेही तय करने की मांग की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने सवाल उठाया कि कथित फर्जी लाभार्थियों को लगभग 20 महीनों तक लाभ कैसे मिलता रहा। यदि ये 80 लाख लाभार्थी फर्जी थे, तो सरकार ने 20 महीने तक उन्हें लाभ क्यों दिया? पाटिल ने दावा किया कि प्रति माह 1,500 रुपये के हिसाब से पिछले 20 महीनों में इन कथित अपात्र लाभार्थियों को लगभग 24,000 करोड़ रुपये वितरित किए गए। यदि सरकार का दावा सही है, तो इस भारी खर्च के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या यह बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया भ्रष्टाचार है?

E-KYC के बाद 70 लाख लाभार्थी हुए बाहर

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हालांकि, 30 अप्रैल की E-KYC समयसीमा के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर करीब 1.7 करोड़ रह गई है, लेकिन यह कटौती केवल E-KYC न कराने के कारण नहीं, बल्कि पात्रता मानदंडों का पालन न करने से भी जुड़ी है। सरकार ने लाभार्थियों को E-KYC पूरा करने के लिए आठ महीने का समय दिया था। वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है और गंभीर वित्तीय संकट के कारण बड़ी संख्या में लाभार्थियों को योजना से बाहर किया जा रहा है।

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First Published - June 2, 2026 | 6:32 PM IST

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