मुंबई में बढ़ती ट्रैफिक समस्या को हल करने और लोगों के लिए परिवहन आसान बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने वॉटर मेट्रो दौड़ाने को हरी झंडी दे दी है। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में जल यात्री परिवहन के लिए वॉटर मेट्रो परियोजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा । वॉटर मेट्रो से मुंबई से नवी मुंबई का सफर सिर्फ 40 मिनट में पूरा होगा।
वॉटर मेट्रो के लिए शिपयार्ड विकसित करने के लिए जमीन की तलाश शुरु कर दी गई । ताकि आवश्यक यात्री नौकाओं का निर्माण महाराष्ट्र में ही किया जा सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जल आधारित परिवहन की समीक्षा की। जल परिवहन संबंधी समीक्षा बैठक में मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे, अपर मुख्य सचिव संजय सेठी तथा महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड के सदस्य सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पी. सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिया कि देश की सबसे बड़ी शिपयार्ड सुविधाओं में से एक विकसित करते समय गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। जल यात्री परिवहन के लिए आवश्यक नौकाओं का निर्माण राज्य के अपने शिपयार्ड में ही किया जाए तथा दूसरे चरण में इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने शिपयार्ड के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान को प्राथमिकता देने तथा जल परिवहन और शिपयार्ड परियोजनाओं को गति देने के निर्देश दिए। बैठक में जलमार्ग, विभिन्न बंदरगाहों के विकास तथा समुद्री यात्री परिवहन परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें नांदगांव, दिघी और विजयदुर्ग में शिपयार्ड विकसित करने, मुंबई महानगर क्षेत्र में जलमार्ग शुरू करने तथा ग्रीनफील्ड शिप बिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने के प्रस्ताव शामिल हैं।
यह वॉटर मेट्रो परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होगी, जिसका उद्देश्य सुलभ, सतत और किफायती जल यात्री परिवहन उपलब्ध कराना है। मुंबई महानगर क्षेत्र में तीन चरणों में लागू होने वाली यह परियोजना विश्व की प्रमुख जल परिवहन परियोजनाओं में से एक बनने की दिशा में है। पहले चरण में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग क्लस्टर नीति के अनुरूप समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया है। इस परियोजना में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मुंबई वॉटर मेट्रो – मुख्य विशेषताएं
• 11 नए जलमार्ग और 24 नए टर्मिनल – 215 किमी
• 21 मार्गों और 20 टर्मिनलों का आधुनिकीकरण – 125 किमी
• एमएमआर में कुल जलमार्ग लंबाई – 340 किमी
• वर्ष 2031 तक 7.5 करोड़ वार्षिक यात्री लक्ष्य
• ₹3,436 करोड़ समुद्री बुनियादी ढांचा निवेश
• 207 इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड नौकाएं; ₹3,156 करोड़ निजी निवेश