facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

Manmohan Singh: नहीं रहे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन

Last Updated- December 26, 2024 | 10:52 PM IST
Manmohan Singh funeral: Manmohan Singh merged with Panchatatva, last rites took place at Nigam Bodh Ghat पंचतत्व में विलीन हुए मनमोहन सिंह, निगम बोध घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

भारत के दो बार प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार, 26 दिसंबर को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें शाम करीब 8 बजे दिल्ली के एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। डॉ. सिंह का निधन एक ऐसे युग का अंत है जिसमें उन्होंने आधुनिक भारत की आर्थिक दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभाई। वह दो बार लगातार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के प्रधानमंत्री रहे। 1991 में उनके द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारत को लाइसेंस-परमिट राज से बाहर निकालकर वैश्विक आर्थिक मंच पर एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया।

जीवन और विरासत

डॉ. मनमोहन सिंह एक सम्मानित अर्थशास्त्री और राजनेता थे। उन्होंने 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनका जीवन और करियर देश की आर्थिक प्रगति और विकास में उनकी अद्वितीय भूमिका के लिए याद किया जाएगा। 26 सितंबर 1932 को पंजाब में जन्मे डॉ. सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में ग्रेजुएशन किया और 1962 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डी.फिल की उपाधि प्राप्त की।

डॉ. सिंह का निजी जीवन भी सादगी और प्रेरणा का प्रतीक रहा। वह गुरशरण कौर से विवाहित थे और उनकी तीन बेटियां हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्हें कई सम्मान मिले, जिनमें भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ भी शामिल है। हाल के वर्षों में वह स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

अर्थशास्त्री से प्रधानमंत्री तक का सफर

डॉ. सिंह ने 1971 में भारत सरकार में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त मंत्रालय के सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

1991 से 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उस समय भारत गंभीर भुगतान संकट का सामना कर रहा था। उन्होंने 1991 में ऐतिहासिक बजट पेश किया, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों के लिए खोल दिया और विकास की नई राह पर डाल दिया।

प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल

डॉ. सिंह ने 22 मई 2004 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और लगातार दो कार्यकालों तक इस पद पर रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने 7.7 प्रतिशत की औसत आर्थिक वृद्धि दर हासिल की और लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। उनके शासनकाल में खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार जैसे अधिकार-आधारित कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया गया।

भ्रष्टाचार के आरोप और चुनौतियां

प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. सिंह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला और कोलगेट जैसे भ्रष्टाचार के मामलों ने उनकी सरकार की छवि को धूमिल किया। 2013 में राहुल गांधी द्वारा एक अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़ने की घटना ने प्रधानमंत्री के अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

यादगार विरासत

इन विवादों के बावजूद, डॉ. सिंह की विरासत एक ईमानदार और संवेदनशील नेता की रही है। उन्होंने भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनका निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके विचारशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का यादगार उदाहरण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

First Published - December 26, 2024 | 10:31 PM IST

संबंधित पोस्ट