प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विकसित भारत की परिकल्पना को 2047 तक साकार करने के लिए केंद्र-राज्य का मजबूत समन्वय और 100-दिवसीय तथा पांच वर्षीय लक्ष्यों के साथ एक निगरानी ढांचा स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के संकल्प को मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री के बयान को नीति आयोग ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘दुनिया अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, फिर भी भारत आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपने विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। भारत जैसे-जैसे विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में प्रगति कर रहा है, हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।’
यह बातें प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान कहीं। इस वर्ष की शासी परिषद की बैठक का विषय ‘विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ था। बैठक में 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उप राज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहली बार था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में आए।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘विकसित भारत के सपने को साकार करने में राज्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इस संदर्भ में निगरानी ढांचे की आवश्यकता और राज्यों द्वारा लक्षित 100-दिवसीय, 5-वर्षीय, 10-वर्षीय लक्ष्य निर्धारित करने पर प्रकाश डाला, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में मदद करेंगे।’
मोदी ने कहा कि राज्यों के बीच सहयोग, संवाद और साझा करने की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘नीति आयोग सहयोग के मंच के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे राज्यों को विचारों का आदान-प्रदान करने और विकसित भारत की दिशा में साथ मिलकर काम करने में सक्षम बनाया जा सके।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का दृष्टिकोण हर राज्य, जिले, ब्लॉक और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए। निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्त्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यों से ब्रांडिंग, व्यापार में सुगमता और डेटा सेंटर तथा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को लैस करने के लिए अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। जनसांख्यिकीय लाभांश के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर है जिसे भारत खोना नहीं चाहता। उन्होंने कहा, ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मांग आधारित कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से अपने युवाओं के लिए सही पारिस्थितिकी तंत्र बनाना प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत द्वारा हाल ही में किए गए मुक्त व्यापार समझौते एमएसएमई के लिए महत्त्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करके और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर वैश्विक बाजारों के लिए तैयार होने में सक्षम बनाया जा सके। प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं पर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक व जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने बताया कि वर्तमान खरीफ सत्र के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
मोदी ने सुझाव दिया कि आकांक्षी जिलों की तर्ज पर कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में नेतृत्व लेने का आग्रह किया ताकि अभूतपूर्व बदलाव लाया जा सके।
मोदी ने राज्यों को महिलाओं की शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देने की सलाह दी ताकि उनकी पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके और भारत की विकास यात्रा को गति दी जा सके। उन्होंने राज्यों से ‘लखपति दीदी’ की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्त्व पर जोर दिया।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि ऊर्जा कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाना और ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करना एक ऐसा मुद्दा था जिसे कई मुख्यमंत्रियों ने बैठक में उठाया था। उन्होंने कहा, ‘जिन चीजों पर चर्चा हुई उनमें से एक आवासीय भवनों, स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों में छतों पर सौर ऊर्जा का विस्तार करना था ताकि ग्रिड बिजली पर घरों की निर्भरता कम हो और सब्सिडी की समस्या से थोड़ी राहत मिल सके।’ नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने कहा कि शांति अधिनियम के कारण निजी क्षेत्र को भी इस क्षेत्र में भागीदारी करने का मौका मिलेगा।