दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने तीन दिन की देरी के साथ गुरुवार को केरल तट पर दस्तक दे दी। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इसकी जानकारी दी। हालांकि, केरल तट तक मॉनसून ने पहुंचने में तीन दिन की देर कर दी है। बारिश की शुरुआत के साथ ही देश में मॉनसून का औपचारिक आगमन हो चुका है। 15 सितंबर के बाद मॉनसून लौटना शुरू कर देता है।
इस वर्ष, ‘अल नीनो’ प्रभाव के कारण मॉनसून की शुरुआत और इसकी प्रगति पर नजरें टिकी हुई हैं। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान जताया था कि मॉनसून 26 मई को केरल में दस्तक दे देगा मगर इसके आने में देरी हुई है।
आईएमडी ने पहले ही अपने वर्षा को लेकर अपना पूर्वानुमान दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 92 प्रतिशत से घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया है। अगर ये अनुमान सच होते हैं तो इसका मतलब होगा कि भारत को 2026 में एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मॉनसून का सामना करना पड़ेगा। सामान्य से कम वर्षा कृषि उत्पादन और मुद्रास्फीति सहित समग्र आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती है।
मॉनसून से धान, मक्का, कपास, सोयाबीन और गन्ना उगाने वाले खेतों की सिंचाई के लिए आवश्यक जल का लगभग 70 प्रतिशत हासिल होता है और जल भंडारों और जलाशयों में जल जमा होता है। इस बीच, मौसम विज्ञान ने यह भी कहा कि अगले दो-तीन दिनों में मॉनसून के लिए गोवा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के अतिरिक्त क्षेत्रों और तमिलनाडु के शेष भागों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हालात हैं।
रेटिंग एजेंसी सीआरआईएसआईएल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि जलाशयों में अच्छे जल स्तर और शुरुआती बुवाई के अनुकूल हालात के दम पर वर्ष 2026 में खरीफ सत्र की शुरुआत स्थिर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है,‘अल नीनो के कारण वर्षा अनियमित हो सकती है मौसम गर्म रह सकता है। इससे जल की कमी और कीटों के संक्रमण एवं रोगों के प्रकोप बढ़ने से फसलों की पैदावार पर नकारात्मक असर हो सकता है। खास कर फसल उगने के शुरुआती महत्त्वपूर्ण चरणों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही, उर्वरकों की सीमित आपूर्ति और फसल सुरक्षा उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता से कृषि कार्यों के लिए जरूरी सामग्री से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वर्षा का वितरण और जरूरी सामग्री की उपलब्धता खरीफ की अंतिम पैदावार निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।