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Monsoon Update: जल्द गर्मी से मिलेगी राहत, निकोबार द्वीप पर दस्तक दे रहा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून: IMD

Monsoon Update: IMD के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 साल में केरल में मॉनसून की शुरुआत की तारीख व्यापक रूप से अलग-अलग रही है।

Last Updated- May 19, 2024 | 7:46 PM IST
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Monsoon Update: भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Monsoon) ने रविवार को देश के दक्षिणी छोर निकोबार द्वीप पर दस्तक दे दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नई दिल्ली से यह जानकारी दी।

मौसम कार्यालय ने कहा, ‘‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून रविवार को मालदीव के कुछ हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण बंगाल की खाड़ी, निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण अंडमान सागर के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है।’’ मॉनसून के 31 मई तक केरल पहुंच जाने की उम्मीद है।

IMD के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 साल में केरल में मॉनसून की शुरुआत की तारीख व्यापक रूप से अलग-अलग रही है। केरल में मॉनसून सबसे देरी से 1972 में 18 जून को और सबसे पहले 1918 में 11 मई को पहुंचा था। मॉनसून पिछले साल आठ जून को, 2022 में 29 मई को, 2021 में तीन जून को और 2020 में एक जून को दक्षिणी राज्य में पहुंचा था।

IMD ने पिछले महीने ला नीना की अनुकूल स्थितियों के कारण सामान्य से अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान जताया था। ला नीना की स्थितियां भारत में मॉनसून के दौरान अच्छी बारिश में मदद करती हैं। देश का बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी से जूझ रहा है और कई स्थानों पर अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कई राज्यों में गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया है और इसका स्वास्थ्य एवं आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।

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दक्षिणी भारत में अप्रैल में लू का प्रकोप देखा गया था। भीषण गर्मी बिजली ग्रिड पर दबाव डाल रही है और जल निकाय सूख रहे हैं। इसके कारण देश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में मॉनसून के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान तेजी से विकास कर रहे दक्षिण एशियाई देश के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

भारत के कृषि परिदृश्य के लिए मॉनसून महत्वपूर्ण है और 52 प्रतिशत शुद्ध खेती योग्य क्षेत्र इस पर निर्भर है। यह देश भर में बिजली उत्पादन के अलावा, पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जून और जुलाई को कृषि के लिए मॉनसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने माना जाता है क्योंकि इस अवधि के दौरान अधिकतर खरीफ फसलों की बुआई होती है।

First Published - May 19, 2024 | 7:46 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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