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Mumbai’s dabbawalas: लंदन में मुंबई के डब्बावालों जैसी डिलीवरी, आनंद महिंद्रा ने बताया “रिवर्स कॉलोनाइजेशन”

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Anand Mahindra on Mumbai's dabbawalas: वीडियो में लंदन के लोग भी साइकिल पर खाना पहुंचाते दिख रहे हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे मुंबई के डब्बावाले करते हैं।

Last Updated- April 29, 2024 | 4:08 PM IST
dabbawalas

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर खूब चर्चे में हैं। उन्होंने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें लंदन की एक कंपनी खाने की डिलीवरी के लिए एक नई तरकीब अपना रही है। ये तरीका बिल्कुल मुंबई के मशहूर ‘डब्बावालों’ की तरह का है। महिंद्रा ने इसे “रिवर्स कॉलोनाइजेशन” बताया है। यानी, जिस तरह अंग्रेजों ने कभी भारत को उपनिवेश बनाया था, उसी तरह अब भारतीय संस्कृति पश्चिमी देशों को प्रभावित कर रही है।

सच तो ये है कि मुंबई के डब्बावाले वाकई शहर की रीढ़ हैं। 100 साल से भी ज्यादा पुरानी ये व्यवस्था ना सिर्फ मशहूर है बल्कि दुनियाभर में इसकी सराहना होती है। वीडियो में लंदन के लोग भी साइकिल पर खाना पहुंचाते दिख रहे हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे मुंबई के डब्बावाले करते हैं।

लंदन में मुंबई के डब्बावालों का सिस्टम

वीडियो में दिखाया गया है कि लंदन की कंपनी “डब्बाड्रॉप” मुंबई डब्बावालों के जीरो-वेस्ट सिस्टम को अपना रही है। ये सर्विस साइकिल से खाना पहुंचाती है और पैकिंग के लिए सिंगल-यूज वाले प्लास्टिक की बजाय ट्रेडिशनल भारतीय स्टील के डिब्बों का इस्तेमाल करती है। 28 अप्रैल को पोस्ट किए जाने के बाद से वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। इसे लाखों बार देखा जा चुका है।

वायरल क्लिप पर लोगों ने दी अपनी राय

जहां कई लोग डब्बा वालों की कुशलता, भरोसेमंद सर्विस और ईको-फ्रेंडली तरीकों की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ कमेंट्स में ये भी बताया गया है कि डब्बाड्रॉप शायद डब्बा वाला सिस्टम को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। एक यूजर ने कहा कि मुंबई में डब्बा वाले घरों से खाना इकट्ठा करते हैं और फिर दफ्तरों तक पहुंचाते हैं। वहीं, डब्बाड्रॉप स्विगी की तरह है, जहां एक ही जगह से खाना पैक होकर कई लोगों तक पहुंचता है। बहरहाल, ज्यादातर लोगों का मानना है कि ये एक अच्छी शुरुआत है।

कई लोगों को ये देखकर गर्व हो रहा है कि भारतीय संस्कृति और इनोवेशन दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं। एक यूजर ने इसे “सही तरह का उपनिवेशीकरण” बताया है। एक यूजर ने बताया कि विदेशों में अभी भी स्टील के टिफिन बॉक्स का चलन कम है, जबकि भारत में ये आम बात है।

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First Published - April 29, 2024 | 4:08 PM IST

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