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‘एशिया के उदय का प्रतीक है नालंदा’, राजगीर में बोले विदेश मंत्री: दुनिया अब सिर्फ पश्चिम की नहीं रही

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नालंदा की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित कर बदलते बहुध्रुवीय विश्व और वैश्विक व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण में इसकी प्रभावी भूमिका पर जोर दिया

Last Updated- March 31, 2026 | 11:01 PM IST
Jaishankar
विदेश मंत्री एस जयशंकर | फाइल फोटो

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक लोकतांत्रिक होती नजर आ रही है तथा विभिन्न संस्कृतियों और समाजों की बढ़ती मुखरता के कारण दुनिया अब एक नए एवं अधिक बहुध्रुवीय स्वरूप की ओर अग्रसर है। 

जयशंकर बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारेाह को संबोधित कर रहे थे। विदेश मंत्री ने कहा, ‘दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय होती जा रही है, क्योंकि अब कई अन्य समाज एवं संस्कृतियां अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठा रही हैं। ऐसे समय में नालंदा की परंपरा वैश्विक व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण को नई दिशा देने में एक सशक्त प्रभाव डाल सकती है।’

उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शिक्षा का ऐसा केंद्र था, जहां दूर-दूर से विद्यार्थी और विद्वान आते थे।

उन्होंने कहा, ‘नालंदा शब्द ही भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक वैभव की स्मृतियां जगाता है। इस संस्थान में उस परंपरा का पुनर्जीवन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के उदय का संकेत है।’ 

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि विश्व में ‘विकास और प्रगति की दिशा’ को लेकर ‘गंभीर बहस’ चल रही है। उन्होंने कहा, ‘इन दिनों अधिकांश विमर्श स्वाभाविक रूप से प्रौद्योगिकी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है, लेकिन नालंदा की मूल भावना हमें यह स्मरण कराती है कि हर पहलू का एक मानवीय पक्ष भी होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’ 

जयशंकर ने उम्मीद जताई कि ‘अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी’ अपने-अपने देश लौटकर भारत की समझ और देश की छवि को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि आप सभी ने यहां अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है और आप अपने साथ भारत का एक अंश लेकर जा रहे हैं, जो आगे भी आपसे जुड़ा रहेगा।’ 

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक नालंदा की प्राचीन गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से स्थापित यह विश्वविद्यालय बौद्धिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान के रूप में भारत और ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) देशों के सहयोग से परिकल्पित किया गया था।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध पुरातात्विक अवशेष, जिन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है, आज के बिहार के नालंदा जिले में स्थित हैं। प्राचीन शिक्षण केंद्र के नाम पर बने नए विश्वविद्यालय परिसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून, 2024 को किया था। 

जयशंकर ने कहा कि इस तरह का प्रत्येक पड़ाव उभरते संस्थान के विकास का संकेत है और अपने आप में उत्सव का कारण है। उन्होंने कहा, ‘इस विश्वविद्यालय से शुरुआत से जुड़ना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से सौभाग्य की बात रही है।’ उन्होंने कहा कि स्वयं नए विश्वविद्यालय में अध्ययन कर चुके होने के कारण वह इस आयोजन के संस्थान के भविष्य के लिए महत्त्व को समझते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय चरित्र के कारण विशिष्ट है और वैश्वीकरण के इस दौर में इसका महत्त्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में बढ़ते हुए आने वाली पीढ़ियों का वैश्विक घटनाक्रमों से अधिक जुड़ा और संवेदनशील होना आवश्यक है तथा इस दिशा में स्नातक विद्यार्थी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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First Published - March 31, 2026 | 11:01 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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