facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

NGT ने असम पर 1,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने से किया इनकार

Advertisement
Last Updated- January 29, 2023 | 9:20 AM IST
National Green Tribunal

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने ठोस और तरल कचरे के अनुचित प्रबंधन के लिए असम पर 1,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने से फिलहाल इनकार किया है।

एनजीटी ने यह देखते हुए पर्यावरणीय मुआवजे का आदेश देने से इनकार किया राज्य ने ठोस कचरे और तरल कचरे के प्रबंधन के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने असम के मुख्य सचिव द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर गौर किया और कहा कि कचरे के प्रबंधन में खामियां हैं।

पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल और अफरोज अहमद भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करना राज्य और स्थानीय निकायों की संवैधानिक जिम्मेदारी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि मुख्य सचिव के साथ बातचीत के आलोक में, असम राज्य एक अभिनव दृष्टिकोण और कड़ी निगरानी के माध्यम से इस मामले में और उपाय करेगा।’’

पीठ ने कहा है कि सभी जिलों, शहरों, कस्बों और गांवों में एक साथ समयबद्ध तरीके से पुनर्नवीकरण योजनाओं को जल्द से जल्द क्रियान्वित करने की जरूरत है और जिला मजिस्ट्रेट सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी करेंगे।

एनजीटी ने कहा कि मुख्य सचिव को मानदंडों का समग्र अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। मुआवजे की मात्रा का निर्धारण करते हुए हरित पैनल ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में राज्य सरकार लगभग 1,000 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी था।

Advertisement
First Published - January 29, 2023 | 9:20 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement