नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार की सुबह एक बड़ा बवाल शुरू हो गया। इस औद्योगिक क्षेत्र में सुबह 6 बजे जब पहली पाली शुरू होने का वक्त आया तो हजारों श्रमिक सेक्टर 62, 63 और फेज 2 में वेतन और खराब हालात के विरोध में जमा हुए और पड़ोसी राज्य हरियाणा की तर्ज पर वेतन बढ़ाने की मांग करने लगे। मगर हालात धीरे-धीरे बिगड़ने लगे और श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गया। इसके बाद उग्र भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों समेत अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
वाहनों के पुर्जे बनाने वाली कंपनी संवर्द्धन मदरसन के एक श्रमिक ने कहा,‘अप्रैल 2025 में भी जब वेतन बढ़ाने का समय आया तो हमारे हितों को दरकिनार कर दिया गया। वर्षों से हमारा वेतन लगभग 10,000 और 10,500 रुपये के बीच ही रहा है।’ पास में ही स्थित एक कपड़ा इकाई के एक श्रमिक ने बढ़ते घरेलू खर्चों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा,‘अगर एलपीजी की कीमतें बढ़कर 1,500-2,000 रुपये हो जाती हैं तो हम कैसे गुजारा करेंगे? या तो कारखाने को उचित भोजन उपलब्ध कराना चाहिए या फिर बढ़ी लागत की भरपाई करनी चाहिए।’
नोएडा के औद्योगिक केंद्र में वाहन पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 12,000 कारखाने हैं। शुक्रवार से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन हरियाणा सरकार के न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी के हालिया फैसले के बाद हो रहे हैं। हरियाणा सरकार की पहल के बाद वहां दैनिक मजदूरी बढ़कर लगभग 580-750 रुपये हो गई है। नोएडा में वर्तमान में दैनिक मजदूरी लगभग 350 से 400 रुपये के बीच है।
वायरिंग कारखाने में काम करने वाले प्रीतम कुमार ने कहा, ‘काम के बदले हमें वाजिब वेतन नहीं मिल रहा है। आज काम पर आने वाला व्यक्ति उतना ही कमाता है जितना कि पांच साल पहले कमा रहा था।’
नोएडा में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के जिला सचिव नईम अहमद ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी लगभग 11,000 रुपये है और ठेकेदार लगभग 1,000 रुपये ले लेते हैं जिससे संविदा श्रमिकों को हाथ में केवल 10,000 रुपये ही आते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर लगभग 15,000 रुपये कर दी है जिसे देखते हुए नोएडा के श्रमिक अब लगभग 20,000 रुपये और अतिरिक्त काम के लिए दोगुना रकम की मांग कर रहे हैं। श्रमिकों ने कुछ दूसरे मुद्दे भी उठाए हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा ‘हमें उचित वेतन पर्ची नहीं मिलती। रोजगार का कोई प्रमाण नहीं है जिससे ऋण लेने में हमें कठिनाई होती है।’
श्रमिकों ने सुरक्षा संबंधी चिंता का भी जिक्र किया। उनमें एक ने कहा,‘कुछ पालियां रात 11 बजे समाप्त होती हैं और औद्योगिक क्षेत्र में वाहनों का भारी आवागमन होता है। कई सहकर्मी घायल हो चुके हैं। उनकी जिम्मेदारी किसकी है?’ श्रमिकों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
संवर्द्धन मदरसन के प्रवक्ता ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया,‘यह एक व्यापक श्रम मुद्दा है जो नोएडा और अन्य शहरों के कई उद्योगों को प्रभावित कर रहा है। वेतन संशोधन के बारे में भ्रामक सूचनाओं के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हमारा संचालन सभी लागू कानूनों के अनुरूप है और कंपनी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है। कर्मचारियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’
नोएडा उद्यमी संघ के अध्यक्ष विपिन कुमार मलहान के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 50 प्रतिशत कारखाने दिनभर के लिए बंद करने पड़े। कई जगहों पर सुरक्षा गार्ड ने बताया कि प्रबंधन के लोग सुबह कुछ देर के लिए आए थे मगर हालात बिगड़ने पर लौट गए। एक कारखाने के बाहर तैनात एक गार्ड ने कहा, ‘हालात बेकाबू हो गए और मालिक और प्रबंधक वापस लौट गए।’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार श्रमिकों के साथ खड़ी है मगर उन्होंने अशांति नहीं फैलाने की भी हिदायत दी। उन्होंने मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम में कहा, ‘औद्योगिक व्यवधान पैदा करने वालों से सावधान रहें। मैं उद्यमियों से भी आग्रह करता हूं कि वे अपने श्रमिकों से सीधे बातचीत करें।’ बाद में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कहा कि अधिकारी हिंसा भड़काने वालों की पहचान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा,‘नोएडा में बड़े-बड़े और नामी कारखाने हैं। नुकसान के साथ-साथ इस घटना से पूरे क्षेत्र की छवि भी खराब हुई है। हमें अपने लोगों का विश्वास फिर से बहाल करना होगा।’
मानेसर, पानीपत और अब नोएडा के औद्योगिक केंद्रों में कामगार स्थिर वेतन और काम के बिगड़ते माहौल से लगातार परेशान हैं। पिछले सप्ताह औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) मानेसर में हजारों संविदा श्रमिकों के सड़कों पर उतरने के बाद झड़पें हुईं।
यह अशांति पश्चिम एशिया से जुड़ी गैस आपूर्ति में व्यवधान के बीच फैली है, जिससे विशेष रूप से सिरेमिक, कांच और छोटे विनिर्माण इकाइयों जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। बढ़ती लागत और आपूर्ति की कमी के कारण कई इकाइयों को उत्पादन कम करना पड़ा है या अस्थायी रूप से परिचालन बंद करना पड़ा है जिसका खामियाजा संविदा श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। काम के घंटे कम हो रहे हैं, वेतन में कटौती हो रही है और नौकरियां असुरक्षित हो रही हैं।
फरवरी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की पानीपत रिफाइनरी में लगभग 30,000 संविदा श्रमिकों ने आठ घंटे की पाली, समय पर वेतन भुगतान, अतिरिक्त काम के लिए मुआवजा और पीने के पानी, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं सहित बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर धरना दिया था।
एआईटीयूसी की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा,‘अनुबंध पर काम करने वाले मजदूरों से बिना अलग से पारिश्रमिक दिए अतिरिक्त काम लिए जा रहे हैं। मानेसर और पानीपत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब नोएडा तक फैल गए हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि चार नए श्रम कानून यूनियनों की भूमिका को कमजोर करके वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सुरक्षा उपायों को कमजोर कर सकते हैं। हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू ने भी ऐसी ही चिंता जताई ।