पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति पर इसके प्रभाव के मद्देनजर ओडिशा सरकार ने मितव्ययिता और ईंधन संरक्षण उपायों के तहत अगले महीने से सभी सरकारी विभागों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की खरीद अनिवार्य कर दी है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने निर्देश दिया है कि सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चार पहिया वाहन 1 जून से ईवी होने चाहिए।
विभागों द्वारा किराये पर लिए गए सभी चार पहिया वाहन भी ईवी होने चाहिए, जबकि पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की खरीद की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जाएगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से अस्थिर अंतरराष्ट्रीय स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर पेट्रोल और डीजल के अनावश्यक उपयोग को कम करने की अपील के बाद उठाया गया है।मांझी ने इससे पहले अपने काफिले में वाहनों की संख्या आधी कर दी थी और लोगों से अनावश्यक ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया था।
इस पहल को प्रशासनिक तंत्र तक बढ़ाते हुए, उन्होंने मुख्य सचिव अनु गर्ग से राज्य भर में सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी सहायता प्राप्त संगठनों में ईंधन की खपत कम करने के लिए एक व्यापक आठ-सूत्री दिशानिर्देश लागू करने को कहा।
खर्च में कटौती के उपायों के तहत, राज्य प्रशासन में अब वर्चुअल शासन व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। सभी आधिकारिक बैठकें, समीक्षाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी, जब तक कि शारीरिक उपस्थिति अत्यंत आवश्यक न हो।
यदि व्यक्तिगत उपस्थिति अपरिहार्य है, तो जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है, वे शारीरिक रूप से उपस्थित होंगे, जबकि अन्य लोग वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को दिए अपने निर्देश में कहा, ‘अधिकारी और कर्मचारी आधिकारिक कार्यों के लिए दूर के स्थानों की यात्रा करते समय निजी सरकारी वाहनों के बजाय बसों और ट्रेनों जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। ईंधन की खपत को और कम करने के लिए, आवासीय क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में स्थित कार्यालयों तक आने-जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस और मिनीबस सेवाएं शुरू की जाएंगी, जहां कई कर्मचारी रहते हैं।’