LPG Price Hike: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को घरेलू रसोई गैस (LPG) के हर एक सिलेंडर पर हालिया 29 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की मूल्य वृद्धि के बावजूद करीब 700 रुपये का घाटा हो रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने रविवार को यह जानकारी दी।
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ईंधन कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बीच पिछले तीन महीनों में एलपीजी की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। मंत्रालय के अनुसार, एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत बढ़कर 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई है। वहीं, एलपीजी के लिए प्रमुख वैश्विक मानक माने जाने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) में 28 फरवरी के बाद से 46 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
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मंत्रालय ने कहा, “इस बढ़ोतरी का असर पूरी तरह बाजार आधारित कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में साफ दिखाई देता है। होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाला 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3,113.50 रुपये में बिक रहा है, यानी लगभग 164 रुपये प्रति किलोग्राम। पश्चिम एशिया संकट के दौरान इसकी कीमतों में पांच बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।”
मंत्रालय ने बताया कि इसके मुकाबले, हालिया संशोधन के बाद घरेलू उपभोक्ता एलपीजी के लिए लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान कर रहे हैं।
7 जून से प्रभावी नई कीमतों के बाद दिल्ली में सामान्य उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर का दाम 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गया है। वहीं, उज्ज्वला योजना के लाभार्थी परिवारों के लिए इसकी प्रभावी कीमत 642 रुपये रहेगी।
देशभर में रसोई गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी 7 मार्च 2026 को की गई 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद की गई है।
अंडर-रिकवरी यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की वास्तविक लागत और सरकार द्वारा तय खुदरा कीमत के बीच का अंतर, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) वहन करती हैं। इसकी आंशिक भरपाई सरकार करती है।
पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर OMCs की कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि इससे पिछले वर्ष यह केवल 1,338 करोड़ रुपये थी। इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल OMCs को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दे चुका है।पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर OMCs की कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि इससे पिछले वर्ष यह केवल 1,338 करोड़ रुपये थी।
एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी अन्य ईंधनों के दाम बढ़ने के बीच की गई है। मई के मध्य से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। वहीं, सीएनजी के दाम भी लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं।
मंत्रालय ने कहा, “संघर्ष बढ़ने के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। इसके चलते इस जलमार्ग से होने वाला अधिकांश वाणिज्यिक परिवहन लगभग ठप हो गया। भारत की कुल एलपीजी खपत का करीब 54 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से आता है, जिससे रसोई गैस की सप्लाई सीधे तौर पर इस व्यवधान की चपेट में आ गई।”
मंत्रालय ने आगे कहा कि उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए पहले चार सिलेंडरों की प्रभावी कीमत 642 रुपये है, जो एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक अंतरराष्ट्रीय कीमत की तुलना में लगभग 60 फीसदी कम है। वहीं, सामान्य उपभोक्ताओं के लिए 942 रुपये की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले करीब 45 फीसदी कम है।