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ओमान संकट: सभी 14 भारतीय नाविक सुरक्षित, लेकिन तीन मौतों पर राजनीतिक टकराव बढ़ा 

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ओमान में भारत के दूतावास का यह स्पष्टीकरण उसी दिन आया जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना तेज कर दी

Last Updated- June 14, 2026 | 11:32 PM IST
Marco Rubio
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो

मस्कट में मौजूद भारतीय मिशन ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक पोत एमएसवी विराट1 के चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान की खाड़ी में सुरक्षित बचा लिया गया है। इस जहाज का इंजन खराब हो गया था। ओमान में भारत के दूतावास ने यह भी कहा कि एक भारतीय नागरिक निशांत उइरथनाथन जो वर्तमान में दुक्म बंदरगाह पर खड़े जहाज एमटी सेलेस्टियल पर सवार थे उनका स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण निधन हो गया। उनके शव को जल्द से जल्द भारत लाने के प्रयास जारी हैं।

ओमान में भारत के दूतावास का यह स्पष्टीकरण उसी दिन आया जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना तेज कर दी। उनका आरोप है कि सरकार भारतीय नाविकों को जान बचाने के लिए अमेरिका का सामना करने में विफल रही।

कांग्रेस ने यह भी जानना चाहा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह होने वाली जी-7 बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात में अमेरिकी सेना के उन घातक हमलों का मुद्दा उठाएंगे, जिनमें भारतीय नाविकों वाले जहाज निशाना बने। पिछले सप्ताह अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया जिसमें तीन नाविकों की मौत हो गई।

शनिवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, ‘वाणिज्यिक जहाजों पर ऐसे घातक हमले उचित नहीं हैं।’

शाम को अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि रूबियो ने जोर देकर कहा कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अमेरिकी बलों के आदेशों का पालन करना चाहिए।

विदेश विभाग के प्रमुख उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिकी मामलों के प्रभारी जेसन मिक्स को दो बार तलब किया। उन्हें बताया गया कि ओमान के तट पर भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक जहाजसें पर अमेरिकी सेना के घातक हमले अस्वीकार्य हैं।

गत 8 जून को अमेरिकी बलों ने मैरिवेक्स नामक एक पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया जिसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए। 10 जून को अमेरिका ने पलाऊ के झंडे वाले एक अन्य टैंकर सेटेबेल्लो पर हमला किया, जिसमें सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई। एक अन्य जहाज जलवीर जो गिनी-बिसाऊ-के झंडे वाला था और जिसमें 20 भारतीय सवार थे उस पर गुरुवार को हमला हुआ।

प्रधानमंत्री ने देश की संप्रभुता को ‘कमतर’ किया : कांग्रेस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयशंकर और रूबियो की बातचीत पर कहा, ‘अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ ही दिनों बाद न तो कोई खेद जताया गया और न ही माफी मांगी गई। इसके विपरीत अमेरिका लगातार आदेश जारी करता जा रहा है।’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीन भारतीय नाविकों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर रविवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि इसके लिए कोई सबूत की आवश्यकता नहीं है कि उन्होंने भारत की वैश्विक स्थिति और संप्रभुता को कमतर किया है। खरगे ने आरोप लगाया कि भारत के राष्ट्रीय हित रोजाना समर्पित किए जा रहे हैं। उन्होंने एक्स पर कहा, ‘ओमान में अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के शव भारत लाये जा रहे हैं, ऐसे में मैं इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करता हूं।’

उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना के तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कोई सार्वजनिक बयान या संवेदना संदेश नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब गंभीर सवाल अनुत्तरित हैं, तब चुप्पी जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश को स्पष्टता चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना की।  उन्होंने कहा कि ओमान के पास अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद मोदी सरकार की चुप्पी शर्मनाक है। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘अफसोस जताने या माफी मांगने के बजाय अमेरिका धमकी और आदेशों की भाषा अपना रहा है।

भारत को यह स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि वह एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र है जो अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है।’ उन्होंने कहा कि हमारे कमजोर प्रधानमंत्री नागरिकों और देश की संप्रभुता दोनों की रक्षा करने में विफल रहे हैं।

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First Published - June 14, 2026 | 11:32 PM IST

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